बरेली। शहर से लेकर देहात तक सड़कों पर दौड़ रहे जुगाड़ वाहन यातायात नियमों को रौंद रहे हैं। इन जुगाड़ वाहनों से धड़ल्ले से माल ढुलाई की जा रही है। अकेले श्यामगंज मंडी में ही इस तरह के 400 वाहन दौड़ रहे हैं। पूरे जिले में देखा जाय तो यह संख्या पांच हजार से ज्यादा होगी। पुराने वाहनों के इंजन, चेसिस आदि को असेंबल कर तैयार किए गए इन जुगाड़ वाहनों का परिवहन विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए जिम्मेदार इससे बेखबर बने हुए हैं।
बहेड़ी, फतेहगंज पश्चिमी में कई स्थानों पर पुराने वाहनों को अनधिकृत रूप से काटकर बेचा जा रहा है। नियमानुसार पुराने वाहनों को अधिकृत सेंटर पर ही स्क्रैप कराया जाना चाहिए। अनधिकृत रूप से चल रहे स्क्रैप सेंटरों के धंधेबाज वाहनों के इंजन और चेसिस को अलग-अलग बेच देते हैं। दोपहिया, तीन पहिया वाहनों के इंजन और चेसिस से बनाए गए जुगाड़ वाहनों को शहर की सड़कों पर दौड़ते हुए आसानी से देखा जा सकता है।
परिवहन विभाग के पास स्क्रैप कराए गए वाहनों का कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। शासन स्तर से सख्ती के बाद अभिलेख खंगाले गए तो 90 हजार वाहन सड़कों से लापता पाए गए। वर्षों से इनकी फिटनेस नहीं कराई गई है। पंजीकरण का नवीनीकरण और टैक्स आदि भी नहीं भरे गए हैं। संबंधित वाहन स्वामियों को नोटिस जारी कर पंजीकरण छह माह के लिए निलंबित किए गए हैं। इसके बाद पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में बिना नंबर के दौड़ रहे सिर्फ 54 वाहनों का चालान किया गया है। 23 वाहनों को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द करने के बाद खुर्द-बुर्द करने की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है। इससे कई गुना ज्यादा संख्या में जुगाड़ वाहन और बिना नंबर के वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से हादसे भी होते हैं। यह बात और है कि परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड में ऐसे वाहनों से हादसों की संख्या भी शून्य है।
किसी वाहन पर कार्रवाई के लिए उसके रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर, इंजन नंबर की जरूरत होती है। परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड में जुगाड़ वाहनों की संख्या शून्य है। 80 हजार से ज्यादा वाहनों के पंजीकरण की मियाद निकल गई है। उनके पंजीकरण निलंबित किए गए हैं। छह माह बाद पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। - मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन