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सुभाष चंद्र बोस जयंती: नेताजी बन गए थे जियाउद्दीन, बहरे पठान के वेश में पेशावर से काबुल तक किया सफर

Mon, 23 Jan 2023 12:44 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

पीलीभीत जिले में भगतराम तलवार ऐसे शख्स थे, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पेशावर से काबुल तक छोड़ने के लिए रहमत खां (छद्म वेश) बन गए थे। नेताजी ने खुद का नाम जियाउद्दीन रखा था।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस
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विस्तार
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बेशक हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन अपने आसपास रहे क्रांतिकारियों के इतिहास और उनके संघर्ष से परिचित नहीं हैं। पीलीभीत जिले में भगतराम तलवार ऐसे शख्स हुआ करते थे, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पेशावर से काबुल तक छोड़ने के लिए रहमत खां (छद्म वेश) बन गए थे। नेताजी ने खुद का नाम जियाउद्दीन रखा था। पीलीभीत की जिस अशोक कॉलोनी में तलवार दो दशक से अधिक समय तक रहे, अब उसी कॉलोनी की नई पीढ़ी उनके योगदान के बारे में नहीं जानती।

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साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने भगतराम तलवार से कोलकाता में 1980 में मुलाकात की थी। उनका साक्षात्कार भी लिया था। सात दिन साथ रहे। वह चाहते हैं कि नेताजी से जुड़े रहे भगतराम तलवार का स्मारक उसी अशोक कॉलोनी में बनाया जाए, जहां वे वर्षों तक रहे। पार्क में मूर्ति और स्मारक बनाने के लिए कॉलोनी की कमेटी ने मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी तक काम नहीं हो सका है। इसका दर्द सुधीर विद्यार्थी को है। वे चाहते हैं राष्ट्रीयता की बात करने वाले आगे आएं। नई पीढ़ी को क्रांतिकारियों के प्रेरक संघर्ष से अवगत कराएं।

ऐसे थे भगतराम तलवार

जर्मनी में हिटलर से मिलने से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भगतराम तलवार के साथ लंबा सफर किया। भगतराम तलवार का जन्म 1908 में पेशावर के निकट (अब पाकिस्तान) हुआ था। पिता गुरदासमल क्रांतिकारी होने के साथ खान अब्दुल गफ्फार खान के करीबी थे। बड़े भाई हरिकिशन को अंगेज गर्वनर को गोली मारने के आरोप में 9 जून 1931 को फांसी दी गई थी। देश विभाजन के समय भगतराम तलवार भारत आए। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पीलीभीत जिले के झनकैया में खेती की जमीन दी थी।

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नेताजी का सफर 

  • 2 जुलाई 1940: देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी हुई।
  • 29 नवंबर 1940: जेल में भूख हड़ताल की।
  • 05 दिसंबर 1940: कोलकाता में अपने ही घर में नजरबंद। 
  • 16 जनवरी 1941: शिविर बोस के साथ घर से निकले, गोमो पहुंचे, दिल्ली के लिए ट्रेन में सवार हुए।
  • 19 जनवरी 1941: फ्रंटियर मेल में सवार होकर दिल्ली से पेशावर पहुंचे, भगतराम तलवार मिले।
  • 26 जनवरी 1941: भगतराम तलवार रहमत खां बने व नेताजी उनके गूंगे-बहरे रिश्तेदार जियाउद्दीन बन गए।
  • 31 जनवरी 1941: दोनों काबुल पहुंचे, 18 मार्च को अफगानिस्तान की सीमा पार कर समरकंद और फिर ट्रेन से मॉस्को पहुंचे। मॉस्को से नेताजी जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुंचे। हिटलर से मिले।
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