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सौहार्द : मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए दिवाली की खुशियों में मोहब्बत के चिरागों से रोशन हुए सूने घर

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बरेली। इस शहर में सौहार्द की एक से बढ़कर एक मिसाल मौजूद है। कहीं कोई मंदिर मुस्लिम ने बनवाया है तो कहीं किसी हिंदू ने मस्जिद की देखभाल की जिम्मेदारी संभाल रखी है। कोरोना के दौर में जाति-धर्म को परे रखकर एक-दूसरे की जीजान से मदद करने के वाकये इसी परंपरा की कड़ी हैं। इस दिवाली पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सूने घरों को दीयों से रोशन करने के साथ झुग्गी-झोपड़ियों में बच्चों के साथ पटाखे चलाकर सौहार्द की इस परंपरा को और मजबूत किया।
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सुभाषनगर इलाके के छोटे से मोहल्ले पुरवा बब्बन खां में नजदीक की ही खन्ना बिल्डिंग के पास रहने वाले समयुन खान और इसराफिल खान सोमवार रात अपने परिचित योगेंद्र शर्मा और इंदू शर्मा के घर दिवाली की मुबारकबाद देने पहुंचे थे। हर तरफ रोशन इलाके में उन्होंने एक घर को सूना पड़ा देखा तो योगेंद्र से पूछताछ की। पता चला कि उस घर में रहने वाला ठाकुर परिवार कहीं और चला गया है। इसी वजह से घर पर अंधेरा पड़ा है।
इस्लाफिल और समयुन ने शर्मा परिवार से बात कर दीए मंगवाए और फिर सारे लोगों ने ठाकुर परिवार के सूने पड़े घर के दरवाजों और दीवारों को रोशन कर दिया। यहीं पर आतिशबाजी भी की। आसपड़ोस के अखिल शर्मा, उर्वशी मिश्रा और तंजीम फातिमा भी इस पहले में शामिल हो गईं।
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मुस्लिमों के संगठन भारतीय सद्भावना मंच और राष्ट्रीय समाज सेवा मंच के सदस्यों ने इज्जतनगर के झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने न सिर्फ झोपड़ियों को दीयों से रोशन किया बल्कि बच्चों को खिलौने, मिठाइयां और घर की सजावट का सामान भी बांटा। इसके बाद उनके साथ फुलझड़ियां भी चलाकर दिवाली की खुशियों में शरीक हुए।
मंच के अध्यक्ष नदीम शमसी ने कहा कि भारत मिलीजुली संस्कृति का देश है। इसकी पहचान तभी कायम रह सकती है जब सभी त्योहारों को साथ मिलजुल कर मनाएं और एक-दूसरे की खुशियों में शामिल हों। गरीबों की झोपड़ियों को रोशन करने में नदीम का साथ उनकी टीम के नवेद शमसी, उमंग सहगल, मोहम्मद अली, नावेद खान, रजत अग्रवाल, गुड्डू ठाकुर, अखिलेश पाठक और मुनीक शमसी ने भी दिया।
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