विभाजनकारी नीतियों का करें विरोध
मदरसा शाने आला हजरत के प्रधानाचार्य मुफ्ती शेख सिराजुद्दीन कादरी ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही सहिष्णुता, स्वीकृति और सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा है। मस्जिद में शादी समारोह भारत की बहुलवाद की परंपरा और विपरीत परिस्थितियों में एकता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। समावेशी आख्यान समझ, सहानुभूति और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दे सकते हैं और एकता की कहानियों को साझा करके हम विभाजनकारी नीतियों का विरोध कर सकते हैं।
इस्लामी रिसर्च सेंटर के उप निदेशक आरिफ अंसारी ने कहा कि विभाजन के मुख्य कारण, जो अक्सर गलतफहमियों पूर्वग्रहों और शिक्षा की कमी से उत्पन्न होते हैं। प्यार, सम्मान और सहानुभूति के गुणों पर जोर देने से मतभेदों को पाटने और समावेशी समाज को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।