मुफ्ती सलीम नूरी ने इस्लामी नजरिये से शांति और मानवता पर तकरीर की। कहा, इस्लाम शांति का मजहब है। इसमें सर तन से जुदा, खून-खराबा, लड़ाई-झगड़ा और दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है।
आला हजरत के 104वें उर्स के मौके पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौहार्द कॉन्फ्रेंस में अवाम को शांति, सद्भाव और एकता का संदेश दिया गया। दरगाह के मदरसा मंजरे इस्लाम के वरिष्ठ शिक्षक मुफ्ती सलीम नूरी ने इस्लामी नजरिये से शांति और मानवता पर तकरीर की। कहा, इस्लाम शांति का मजहब है। इसमें सर तन से जुदा, खून-खराबा, लड़ाई-झगड़ा और दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है। मुस्लिम नौजवानों को ऐसे किसी भी काम से खुद को दूर रखने की ताकीद की।
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मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने सामाजिक बुराइयों और सुधार पर बात रखी और हिंदू मुस्लिमों के बीच दूरियां खत्म करने की अपील की। कहा, मुल्क और समाज की बेहतरी के लिए इस दौर में नफरतों के खात्मे की जरूरत है। मिलजुल कर रहने से ही मुल्क तरक्की कर सकता है। मौलाना इंतजार रजवी ने कहा कि अब जरूरत है कि हिंदू मुस्लिमों के बीच गठजोड़ के लिए देशप्रेमी आगे आकर अभियान चलाएं।
कारी अब्दुर्रहमान खान कादरी ने कहा कि नौजवान भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट से बचें। उन्होंने सरकार से मांग की कि जो लोग जो पैगंबरे इस्लाम या किसी भी मजहब के रहनुमाओं के खिलाफ टिप्पणी करते हैं, उनके लिए सख्त कानून बनाया जाए।
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कॉन्फ्रेंस दरगाह प्रमुख मौलान सुब्हान राज खां की सरपरस्ती और सज्जादा मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी की सदारत में संपन्न हुई। इसमें मॉरीशस के मुफ्ती आसिफ मंजरी, मुफ्ती अब्दुल कादिर, साउथ अफ्रीका के कारी अलीम बरकाती, नेपाल के मौलाना फूल मोहम्मद नेमत बरकाती, मौलाना फुरकान फैजी, उड़ीसा के मौलाना आसिफ रजा, अल्लामा हसन रजा पटनवी आदि ने भी तकरीर की।
कॉन्फ्रेंस में महिलाओं पर जुल्म के खिलाफ भी आवाज उठी। संचालक कारी यूसुफ संभली ने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। कहा, महिलाओं के साथ होने वाले जुल्म ज्यादती और आपराधिक घटनाएं शर्मनाक हैं। इन्हें सख्ती से रोकने की जरूरत है। इसी के साथ शादियों में फिजूलखर्ची, आपसी लडाई-झगड़े, सूदखोरी और ढोल-बाजों से बचने की भी नसीहत दी।