उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम लड़कियों के बहकने की एक वजह शादियों में फिजूलखर्ची व दहेज जैसी सामाजिक बुराई भी है। जिससे शादियां मुश्किल हो रही है जबकि अल्लाह के रसूल ने निकाह को आसान करने का हुक्म दिया।
मुरादाबाद के अल्लामा कारी सखावत हुसैन रजवी ने भी मुस्लिमों में शिक्षा व महिलाओं में सशक्तीकरण पर जोर दिया। कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने मुफ्ती-ए-आजम हिन्द को खिराज ए अकीदत पेश करते हुए कहा कि मुफ्ती आजम हमेशा सच्चाई पर कायम रहते हुए शरीयत में बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं की। आज हमें उनसे सीख लेकर मजहब व शरीयत की भी हिफाजत करनी है ताकि बहन-बेटियों को गलत लोगों के चंगुल से बचाया जा सके।
'मुस्लिम महिलाएं वोट के महत्व को समझे'
देशभर से आए उलेमा ने मौजूदा दौर में मुसलमानों में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक क्षेत्र में जागरुकता लाने पर चर्चा की। मुख्य रूप से आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम महिलाओं को संदेश दिया गया कि वह अपने वोट के महत्व को समझे। कहा कि वोट देने जरूर जाएं और खुद में अभी से वोट के इस्तेमाल की भावना पैदा करें।
1:40 मिनट पर हुई कुल की रस्म
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि देर रात एक बजकर चालीस मिनट पर मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म सैय्यद आसिफ मियां, मुफ्ती आकिल रजवी, मुफ़्ती अय्यूब नूरी, मुफ्ती सैय्यद कफील हाशमी, मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती जमील, मुफ्ती अनवर अली की मौजूदगी में अदा की गई।
सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन ररा कादरी ने मिल्लत व मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआ की। उर्स का आगाज नमाज फज्र कुरानख्वानी से हुआ। नातख्वा हाजी गुलाम सुब्हानी,आसिम नूरी व महशर बरेलवी ने आला हजरत व मुफ्ती आजम हिंद द्वारा लिखे कलाम पेश किए। इससे पहले मुख्य कार्यक्रम की शुरूआत कारी रिजवान रजा ने तिलावत-ए-कुरान से दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां की मौजूदगी में हुई।