बरेली। घंटाघर स्थित मोती पार्क आजादी की लड़ाई का गवाह है। कई आंदोलनों की यादों को समेटे मोती पार्क में अब मल्टीलेवल पार्किंग बन गई है। बतौर निशानी यहां मंच का थोड़ा सा चबूतरा ही बचा है। महात्मा गांधी, जवाहर लाल जैसे दिग्गज नेताओं ने इसी मंच से आजादी का बिगुल फूंका था।
मोती पार्क स्वतंत्रता से पहले क्रांतिकारियों का सभा स्थल रहा था। बात 1930 की है। तब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चरम पर था। तभी लाहौर में इंडियन नेशनल कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। इसमें पंडित नेहरू ने पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कर दी थी। साथ ही यह भी तय हुआ कि 26 जनवरी 1930 को आजादी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उस समय लाहौर के सम्मेलन में बरेली से भी कई आंदोलनकारी शामिल हुए थे।
लाहौर सम्मेलन से लौटकर उन्होंने 26 जनवरी 1930 को आजादी दिवस की घोषणा के लिए मोती पार्क में सभा बुलाई गई थी। इसमें हजारों नागरिकों ने एक स्वर में भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने की प्रतिज्ञा ली थी। इसके बाद जिले में अंग्रेजों के खिलाफ छिड़ी जंग आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 तक जारी रही। इस बीच यहां पर क्रांतिकारियों की अनेक सभाएं हुईं।
इतिहासकार प्रो. गिरिराज नंदन बताते हैं कि मोती पार्क की जगह पर पहले बड़ा मैदान था। यहां वर्ष 1920 में महात्मा गांधी ने पहली सभा की थी। तब उनके साथ स्वामी सत्यदेव और अली बंधु भी आए थे। हजारों की भीड़ जुटी थी। यहां एक बार पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की भी सभा हुई थी। इसके बाद ही उनके प्रस्ताव पर इस जगह का नाम मोती लाला नेहरू के नाम पर मोती पार्क रखा गया था। संवाद