बरेली। 138 की जगह 738 रुपये की दर से बंदर पकड़ने का टेंडर होने के बावजूद शहर में आतंक कायम है। नगर निगम परिसर में ही बंदर धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं, जबकि नगर निगम कागजी उछलकूद से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले बंदरों को पकड़ने का टेंडर खत्म हो गया था। इसके बाद पुरानी एजेंसी से ही काम चलाया जा रहा था। पुरानी एजेंसी के हाथ खड़ा करने के बाद नगर निगम ने मथुरा के इमरान कॉन्ट्रैक्टर को इसका टेंडर दिया। अब तक 400 बंदर पकड़ने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन शहरवासियों को राहत नहीं मिल पा रही है।
घरों में कैद रहते हैं रेलवे कॉलोनी के लोग
रेलवे कॉलोनी में बंदरों के आतंक की वजह से लोग घरों में कैद रहते हैं। उनका छत पर जाना भी मुश्किल हो गया है। क्षेत्र की निभा देवी ने बताया कि कई बार उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उन्होंने रेलवे की जिम्मेदारी बताते हुए मना कर दिया। बंदरों की वजह से वह महिलाएं छतों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
रोस्टर के मुताबिक चल रहा अभियान
नगर निगम के डॉ. आदित्य तिवारी के मुताबिक रोस्टर के हिसाब से बंदर पकड़े जा रहे हैं। 21 सितंबर से दो अक्टूबर तक बने रोस्टर के मुताबिक वार्ड 46 गांधीपुरम, वार्ड 35 रामपुर गार्डन, वार्ड 72 आलमगिरीगंज, वार्ड 49 शास्त्रीनगर, वार्ड 50 जनकपुरी, वार्ड 66 बजरिया पूरनमल, वार्ड 68 खन्नू मोहल्ला, वार्ड 69 शाहबाद, वार्ड 76 इंग्लिशगंज में अभियान चलाया गया है। वार्ड 77 के मोहल्ला सौदागरान में दो अक्टूबर को अभियान चलेगा। अब तक 400 बंदरों को पकड़कर पीलीभीत के जंगल में छोड़ा गया है।
इन इलाकों में ज्यादा परेशानी
नगर निगम, रेलवे कॉलोनी, जंक्शन परिसर, आजादनगर, आवास विकास कॉलोनी, जनकपुरी, एकतानगर, डीडीपुरम, प्रेमनगर, सुभाषनगर, बदायूं रोड, रामपुर बाग, कैंट, बाग ब्रिगटान, इंदिरा नगर, मुंशीनगर, कटरा चांद खां, ब्रह्मपुरा, करगैना, तिलक कॉलोनी, पटेल विहार, विश्वनाथपुरम, वीरभट्टी, राजेंद्रनगर, जगतपुर, शाहदाना, जोगी नवादा, आलमगिरीगंज, गंगानगर में बंदरों का सबसे अधिक आतंक हैं।