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Bareilly News: मंत्री व अधिकारी दावे करने में व्यस्त...शहर में यातायात बाधित कर रहे छुट्टा पशु

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बरेली। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अफसरों को चेतावनी दी है कि पहली जनवरी से सड़कों पर छुट्टा और निराश्रित पशु नजर न आएं। समीक्षा बैठकों में मंत्री और अधिकारी दावे कर रहे हैं कि बड़ी संख्या में छुट्टा पशुओं को हटा भी दिया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए छुट्टा पशु कई स्थानों पर बाधा बन रहे हैं। फिलहाल जो स्थिति है, उसके हिसाब लगता नहीं कि पहली जनवरी से छुट्टा पशु सड़क पर नजर नहीं आएंगे।
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स्थिति यह है कि नगर निगम के पास छुट्टा पशुओं की कोई गणना ही नहीं है। विभाग को 31 दिसंबर तक 310 निराश्रित गोवंश को गो-आश्रय स्थल में भेजने का लक्ष्य मिला है। दावा है कि इसमें 230 पशु भेजे जा चुके हैं। सड़कों पर घूम रहे कुल 80 निराश्रित पशु और पकड़े जाने हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि अभी बड़ी संख्या में छुट्टा पशु घूम रहे हैं।
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. आदित्य तिवारी भी नहीं बता पा रहे कि कितने छुट्टा पशु शहर में घूम रहे हैं? उन्होंने कहा कि कुछ डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद पशु छोड़ देते हैं। इनसे कुछ स्थानों पर ट्रैफिक बाधित होने की जानकारी है। ऐसे स्थानों पर अभियान के तहत पशु पकड़े भी गए हैं। नगर निगम ने ऐसे 25 पशु पालकों पर जुर्माना भी किया है। अगर किसी डेयरी संचालक का पशु छुट्टा सड़क पर मिला तो पहली बार में 1500 और दूसरी बार में 3000 रुपये वसूले जाएंंगे। तीसरी बार में पशु को जब्त किया जाएगा।
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ये है हाल

1- बरेली कॉलेज चौराहे पर छुट्टा पशु दिन में कई बार ट्रैफिक रोकते हैं। नगर निगम के अफसर इसी मार्ग से गुजरते हैं पर छुट्टा पशु नहीं हटे।
2- अय्यूब खां चौराहे से अटल सेतु की ओर जाएंगे तो रास्ते में कई जगह छुट्टा पशु मिल जाएंगे। वाहन संभालकर चलाने की जिम्मेदारी आपकी है।


3- चौपुला से सुभाषनगर की ओर चलेंगे तो मालगोदाम के पास सड़क किनारे कूड़े का ढेर है। यहां आसपास दिन भर छुट्टा पशुओं का जमावड़ा रहता है।

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कान्हा गोशाला में क्षमता से ज्यादा हैं पशु

बरेली। नदौसी की कान्हा गोशाला की क्षमता 900 की है। इसमें 1100 पशु रखे गए हैं जो कि क्षमता से ज्यादा हैं। शेड बनाकर 300 पशु और रखने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन पार्षदों का कहना है कि शहर में एक हजार से अधिक पशु छुट्टा घूम रहे हैं। ऐसे में भविष्य में छुट्टा पशुओं को कहां रखा जाएगा? ये सवाल भी उठ रहा है। यही नहीं पार्षदों ने छुट्टा पशुओं को पकड़ने में ढिलाई बरते जाने का भी आरोप लगाया है। पार्षद राजेश अग्रवाल के अनुसार डेयरी संचालकों से सांठगांठ के चलते उनके पशु नहीं पकड़े जाते और वही शहर में घूमते हैं।
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ब्यूरो
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