पशु उत्थान वर्ण संकर केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि अगर केंद्र चालू हो जाता तो नस्ल सुधार के लिए शोध को बढ़ावा मिलता। बछिया पैदा करने के लिए सीमन का निर्माण होने लगता। बरेली से कई जनपदों को सीमन की आपूर्ति की जाती। यह कब तक चालू होगा, कुछ कह पाना संभव नहीं है।
निरीक्षण तक सीमित अफसर
जब जब केंद्र के सफेद हाथी बन जाने का मुद्दा उठता है, कोई न कोई अफसर केंद्र का निरीक्षण करने पहुंच जाता है। अप्रैल में जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघ श्याम ने निरीक्षण कर जमीनी हकीकत से संबंधित रिपोर्ट विभागीय निदेशालय को भेजी थी, लेकिन अब तक इसके संचालन की कोई कार्ययोजना सामने नहीं आई। पशु पालकों को उन्नत नस्लों के विकसित होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
पशुधन मंत्री का जनपद फिर भी इंतजार
आंवला विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के जनपद में नस्ल सुधार के लिए बनाए गए केंद्र के संचालन का इंतजार हो रहा है। पशुपालन में सुधार के लिए किसान चर्चा करते हैं तो इसका जिक्र करना नहीं भूलते। पशु पालकों का कहना है कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र का संचालन जरूरी है।