बरेली। छानबीन में पता चला कि दीपक की कार में पेट्रोल और सीएनजी पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। इसी आधार पर पुलिस का मानना है कि दीपक की हत्या के बाद हत्यारे उनका शव कहीं दूर ले जाकर ठिकाने लगाना चाहते थे लेकिन मजबूरन रास्ते में छोड़कर भागना पड़ा। कार आधी सड़क घेरकर खड़ी हुई थी और उसमें रिवर्स गेयर लगा हुआ था। यानी हत्यारे उसे सड़क किनारे ठीक से खड़ी तक नहीं कर पाए।
सोप और डिटर्जेंट कारोबारी दीपक गांधी की गर्दन, पीठ और बांए हाथ के साथ चेहरा भी बुरी तरह जला हुआ था। पुलिस ने छानबीन करने के बाद कार को सड़क से हटाना चाहा तो पता चला कि कार में न पेट्रोल है न ही सीएनजी। पुलिस को धक्का लगवाकर कार को हटाना पड़ा। इसी आधार पर पुलिस का मानना है कि हत्यारे दीपक के शव को उनकी कार में ही कहीं दूर ले जाकर ठिकाने लगाना चाहते थे लेकिन गलियों से गुजरते वक्त पेट्रोल और सीएनजी खत्म होने के बाद बन्नूवाल नगर में छोड़ गए।
जहां दीपक की कार खड़ी मिली, वहां आसपास सुनसान इलाका है और कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे है। इसी वजह से सड़क पार लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस चेक कर उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जो रेस्टोरेंट से खाना मंगवाते वक्त दीपक के साथ थे। दीपक की हत्या के खुलासे के लिए पुलिस की तीन टीमें गठित की गई है। साथ ही क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया है। इज्जतनगर और प्रेमनगर थाने की पुलिस को भी छानबीन का आदेश दिया गया है। नवागत एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया ने पुलिस को जल्द हत्याकांड का खुलासा कर हत्यारों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है।
मृतक दीपक की पत्नी ज्योति बिशप कोनराड स्कूल में शिक्षक हैं। उनके दो बच्चे है। बेटी 21 वर्षीय निहारिका और छोटा बेटा 17 वर्षीय द्वियांश है। दीपक की मौत की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
साफ नहीं, तेजाब से जलाया या केमिकल से : दीपक का शव बुरी तरह जला हुआ था। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को तेजाब से जलाया गया या किसी और केमिकल से। तेजाब की संभावना कम मानी जा रही है। परिवार वालों के मुताबिक सोप और डिटर्जेंट का कारोबार होने की वजह से दीपक को केमिकल की अच्छी जानकारी थी।
पुलिस को शक, लेनदेन हो सकता है हत्या की वजह
परिवार ने कोई रंजिश होने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि कारोबारी होने के कारण दीपक का लेनदेन कई लोगों से होता था लेकिन वह अकेले ही सारा काम देखते थे और परिवार के लोगों को इसकी जानकारी नहीं देते थे। पुलिस को शक है कि हत्या की वजह लेनदेन का विवाद ही हो सकता है, हालांकि स्पष्ट रूप से वह कुछ कहने से बच रही है।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने जुटाए साक्ष्य
घटनास्थल पर पुलिस के साथ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी पहुंची और कार के आसपास जांच पड़ताल कर टायरों के निशान चेक किए। कार से फिंगर प्रिंट भी लिए गए है। खासतौर पर कार की पिछली सीट के आसपास फिंगर प्रिंट और साक्ष्यों की तलाश पर ज्यादा फोकस रहा। फोरेंसिक टीम और पुलिस को कार में मारपीट या हाथापाई का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इससे साफ हो गया कि हत्यारों ने दीपक को कार से उतारकर मारपीट की और फिर उनकी हत्या कर शव कार में डालदिया। कार को लॉक भी नहीं किया।
फैक्टरी बंद होने के बाद शुरू किया था कारोबार
भतीजे सूर्यांश के मुताबिक दीपक की पहले पंकज सोप एंड केमिकल के नाम से फैक्टरी जिसे उन्होंने घाटा होने के बाद बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सोप और डिटर्जेंट का थोक कारोबार शुरू कर दिया था। वह ऑर्डर पर दूसरी फैक्टरियों से भी माल बनवाकर अपने डीलरों को बेचते थे। वह काफी समय यह कारोबार कर रहे थे और इससे उनकी अच्छीखासी आय थी।
थाना प्रेमनगर में दीपक बेटी की ओर से उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। सोमवार रात उनका शव इज्जतनगर इलाके में मिला है। पुलिस परिवार वालों के संपर्क में है। परिवार की ओर से तहरीर मिलने के बाद उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - मुकेश प्रताप सिंह, एसपी क्राइम