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Bareilly News: दूसरे दिन भी हावी रही गलन, बच्चे नहीं पहुंचे स्कूल

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बरेली। 25 दिनों के शीतकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलने लगे हैं पर बच्चे नहीं पहुंच रहे है। बुधवार को भी ज्यादातर परिषदीय विद्यालयों में कक्षाएं सूनीं रहीं। सिस्टम को भले ही ठंड का एहसास न हो पर बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावक फिक्रमंद हैं। शिक्षकों ने बताया कि सर्दी की वजह से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। कई अभिभावकों ने बच्चों को बीमार होने की बात भी कही। मॉडल कंपोजिट विद्यालय किशोर बाजार, प्राथमिक विद्यालय बाकरगंज, मॉडल कंपोजिट विद्यालय जसोली, चीनी मिल, हजियापुर, कांकर टोला समेत लगभग सभी जगह यही हाल रहा। प्रभारी बीएसए भानुशंकर गंगवार ने बताया कि तापमान में गिरावट की वजह से बच्चे कम संख्या में आ रहे हैं।
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प्राथमिक विद्यालय हजियापुर
स्कूल में 150 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं पर सुबह महज तीन बच्चे स्कूल पहुंचे। शिक्षकोंं ने होमवर्क देकर उन्हें घर भेज दिया। सर्दी की वजह से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। प्रधानाध्यापक दुर्गेश बाबू ने बताया कि अभिभावकों को फोन किया लेकिन तो उन्होंने सर्दी की वजह से बच्चों को स्कूल भेजने से इन्कार कर दिया।

प्राथमिक विद्यालय कांकर टोला
यहां पंजीकृत 150 से अधिक बच्चों में से महज तीन ही स्कूल पहुंचे। शिक्षिका ने बताया कि वह कई अभिभावकों को फोन कर चुकी हैं। कुछ ने बच्चों की तबीयत खराब होने की बात कहकर स्कूल भेजने से मना कर दिया है। इसी बीच एक अभिभावक यह भी जानने स्कूल पहुंची कि बच्चों को कब से स्कूल भेजना सही रहेगा।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय आईवीआरआई
करीब दो सौ बच्चे पंजीकृत हैं पर बुधवार को सातवीं और आठवीं कक्षा के सिर्फ 20 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। कई अभिभावक दोपहर 12:30 बजे के बाद अपने बच्चों को ले गए। दोपहर में जब धूप खिली तो शिक्षकों ने बच्चों को धूप में बिठाकर ही कक्षाएं लगाईं। प्रधानाध्यापिका नीति छाबड़ा ने बताया कि 28 जनवरी के बाद ही छात्र संख्या में सुधार दिखेगा।
अब भी सहायता राशि का इंतजार
सर्दी चरम पर हैं, लेकिन जिले के 65 हजार विद्यार्थी स्वेटर, जूते-मोजे आदि के लिए सहायता राशि की राह देख रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 31 जनवरी तक सहायता राशि जारी होने की संभावना है। स्वेटर, जूते-मोजे आदि न होने की वजह से भी कई बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक दुर्गेश बाबू ने बताया कि उनके स्कूल में भी करीब 80 बच्चों को सहायता राशि नहीं मिली है।
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