बरेली। बहेड़ी सीएचसी पर रुपये लेते हुए वायरल हुए चिकित्सा अधीक्षक के फोटो ने उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है। वह आरोपों को भले ही निराधार बता रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि नियमों के अनुपालन में ढिलाई पर वह घिर सकते हैं।
आरोप है कि 35 सीएचओ से चिकित्सा अधीक्षक ने संसाधन खरीदारी के लिए 18 हजार रुपये का चेक लिया, लेकिन संसाधन खरीदारी के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कोई दिशानिर्देश जारी हुए थे या नहीं? यह स्पष्ट नहीं है। अगर आदेश हुए भी थे तो टेंडर प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? जबकि नियमानुसार टेंडर निकालकर कम से कम दाम में संसाधनों की खरीदारी की जानी चाहिए थी। इसके लिए कम से कम तीन फर्मों का टेंडर में शामिल होना जरूरी था। सीएचओ को जितने रुपये का सामान खरीदकर सौंपा गया, वह बाजार भाव से कम है तो यह कैसे तय हुआ?
इसके अलावा सवाल उठ रहा है कि कार्यालय में कैश लेनदेन क्यों हुआ? जब कैश में भुगतान लौटाया तो इसका समायोजन दस्तावेजों में कहां दिखाया? परफार्मेंस बेस्ड इंसेंटिव के भुगतान भी चहेतों को दिए जाने का आरोप है। सीएचओ की शिकायत के बाद शासन के निर्देश पर अब सीएमओ ने प्रकरण की जांच शुरू कराई है। रिपोर्ट में हकीकत सामने आने की उम्मीद है। ब्यूरो