खेल हमेशा से विकास और एकता का प्रतीक रहा है। खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के पीछे कोच की बड़ी भूमिका रहती है। शहर में कई ऐसे कोच हैं, जो खिलाड़ियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। लेकिन मानदेय पर खेल छात्रावासों में प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक-दो आवेदन ही आते हैं। इस बार भी 1.5 लाख रुपये के मानदेय पर 22 फरवरी तक आवेदन मांगे गए, लेकिन सिर्फ एक तीरंदाज ने ही पंजीकरण कराया। कोरोना काल के बाद से स्टेडियम में कोच का अभाव है। लेकिन निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे कोच मिसाल कायम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस की शुरुआत 6 अप्रैल, 2014 को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की ओर से मान्यता मिलने के बाद हुई थी। इसे पहली बार 23, अगस्त, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल मनाने की घोषणा की थी।
आवेदन न करने की वजह
1.5 लाख रुपये के मानदेय पर खेल प्रशिक्षकों को छात्रावासों में नियुक्त करने की योजना के मापदंड काफी ऊंचे हैं। इसमें हर चार साल में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का प्रतिभागी होना अनिवार्य है। इस स्तर पर या तो खिलाड़ी खेलों से ही पैसा कमा लेते हैं या फिर खिलाड़ियों की नियुक्ति कहीं और हो जाती है। यही कारण है कि कई बार भर्ती खुलने के बाद भी आवेदन नहीं आते हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के मददगारप
32 वर्षीय राम अवतार सिंह वर्ष 2013 से खिलाड़ियों को बैडमिंटन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। समय के साथ बैडमिंटन खेल में काफी खर्चीला हो गया है। इसलिए वह उन खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि जब वह सशस्त्र सीमा बल में कार्यरत थे, तभी से खिलाड़ियों को बैडमिंटन सिखा रहे हैं। उनका कहना है कि वह पैसों की वजह से खिलाड़ियों की प्रतिभा को दम तोड़ते हुए नहीं देख सकते हैं। अपने स्तर से हर संभव मदद करते हैं।
खिलाड़ियों को भ्रष्टाचार से बचाने की कोशिशरिठौरा निवासी साहिबे आलम जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव हैं। उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए कई बार बतौर प्रशिक्षक चुना जा चुका है। वह रिठौैरा में आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं। हाल ही में उनके नेतृत्व में दो खिलाड़ियों का खेल कोटे से पुलिस सेवा में चयन हो गया है। उनका कहना है कि खेल में बहुत भ्रष्टाचार है। मेरी हमेशा खिलाड़ियों को इससे बचाने की कोशिश रही है।
बीस वर्षों से मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे
कर्मचारी नगर में रहने वाले पदमवीर सिंह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। वह बरेली जोन के कबड्डी एसोसिएशन के सचिव भी हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 20 सालों से रोड नंबर चार स्थित स्टेडियम में निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में कई खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। पदमवीर का कहना है कि अगर प्रतिभा हो तो खिलाड़ियों को हर मौके मिलना जायज है।
अनुभव सये तरास रहे भविष्य
वरिष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी नितीश भारद्वाज पिछले एक साल से स्टेडियम में छोटे बच्चों व किशोरों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वह सुबह शाम अपने अनुभव से खिलाड़ियों का भविष्य साकार करने में लगे हुए हैं। उनके नेतृत्व में कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि क्रिकेट का क्रैज सबसे ज्यादा है। स्टेडियम में कोरोना के बाद से कोच नहीं है। खिलाड़ियों का समय खराब न हो इसलिए अपने अनुभव से उन्हें प्रशिक्षण दे रहा हूं।