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Bareilly News: दुकानों के आवंटन पर महापौर और स्मार्ट सिटी सीईओ आमने-सामने

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बरेली। क्योस्क दुकानों के आवंटन में पहले धांधली का आरोप लगा। फिर अपात्रों को दुकानें आवंटित करने का मामला सामने आया। नगर निगम उपसभापति अतुल कपूर ने महापौर डॉ. उमेश गौतम को पत्र लिखकर जांच कराने की बात कही। अब यह भी सामने आया है कि नगर निगम बोर्ड की अनुमति के बिना ही क्योस्क दुकानें आवंटित कर दी गई हैं। इसे लेकर महापौर ने स्मार्ट सिटी सीईओ निधि गुप्ता वत्स को पत्र लिखा है।
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महापौर के पत्र के मुताबिक, एलन क्लब मंडी के पास चार क्योस्क का निर्माण किया गया है। जिसे कमिश्नर बीएससीएल की ओर से आवंटित करने का फैसला लिया गया। आपको यह अवगत कराना है कि नगर निगम की किसी जमीन पर बीएससीएल को कार्य करने के लिए नगर निगम के बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक ही नही अनिवार्य है। पूर्व में भी विभिन्न प्रोजेक्टों पर अनापत्ति ली गई है। इसलिए यह कहना कि नगर निगम बोर्ड के अधिकार में नही है, न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। इसलिए इस पर दोबारा विचार कर अवगत कराएं।
स्मार्ट सिटी सीईओ ने महापौर के जवाब में लिखा है कि स्मार्ट सिटी के तहत चार क्योस्क दुकानों का निर्माण किया गया है। इसे बीएससीएल की ओर से नगर की स्वयं सहायता समूह को इस उद्देश्य के साथ आवंटित किए जाने का निर्णय लिया गया है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को एक स्थायी स्थान उपलब्ध कराकर उनकी ओर से निर्मित उत्पादों की बिक्री की जा सके। इसके अलावा क्लाॅथ वेडिंग मशीन, ऑर्गेनिक कंपोस्ट, पुराने कपड़ों का संग्रह व दुग्ध डेयरी उत्पादों की बिक्री के लिए आवंटित किए जाने का निर्णय लिया गया। इसमें बीएससीएल की ओर से निविदा निकाली गई थी। चौथी बार में 19 निविदाएं प्राप्त हुईं। स्वयं सहायता समूह के प्रस्तुतीकरण के बाद बीएससीएल के अधिकतम राजस्व दिए जाने की संस्तुति के आधार पर आवंटन किया गया है। क्योस्क निर्माण व आवंटन बीएससीएल के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत होने के कारण बीएससीएल की पत्रावलियां व कार्य का परीक्षण नगर निगम बोर्ड के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत नहीं है।
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नगर निगम उपसभापति ने मेयर को दिए पत्र में आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतें की थीं। बताया जा रहा है कि एक दुकान पर नगर निगम की मौजूदा पार्षद बैठती हैं। उन्हीं के परिवार में इस दुकान का आवंटन हुआ है। पिछले सप्ताह कुछ और समूहों की महिलाओं ने नगर निगम के अन्य अफसरों से मिलकर इस मामले में शिकायत की गई थी। उन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया है कि उन्हें आगे कुछ और काम दिया जाएगा।


बोर्ड सर्वोपरि है। बोर्ड की सहमति के बिना इस तरह का निर्णय लेना संदेह के दायरे में आता है। पिछले काफी समय से इस तरह के काम हो रहे हैं। बोर्ड के संज्ञान में नहीं लाया जाता है और अधिकारी मनमाने तरीके से कर लेते हैं। जो प्रक्रिया है उसे अपनाया जाना चाहिए। -गौरव सक्सेना, सपा पार्षद दल नेता


नगर निगम क्षेत्र की जमीन पर कोई निर्माण हो रहा है, उसका आवंटन भी हो रहा है तो इसकी अनुमति नगर निगम बोर्ड से लेना जरूरी है। ऐसा नहीं कह सकते हैं बोर्ड के अंतर्गत नहीं है। बोर्ड से ऊपर कुछ भी नहीं। -अतुल कपूर, पूर्व उपसभापति
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