मंगलवार शाम सात बजे मौलाना तौकीर को घर में नजरबंद कर दिया गया था। सीओ प्रथम श्वेता यादव, सीओ टू राजकुमार मिश्रा और कोतवाल हिमांशु निगम उनके घर में जाकर बैठ गए थे। वहीं, बाहर पुलिस और पीएसी का पहरा लगा दिया गया था। रात में पहरा लगा रहा तो बुधवार दोपहर बारह बजे मौलाना के दिल्ली कूच का कार्यक्रम भी विफल हो गया। दोपहर करीब दो बजे नजरबंद मौलाना तौकीर छत से नीचे उतरने लगे। मौलाना को नीचे दूसरे घर की बैठक में नमाज पढ़ने जाना था।
पुलिस को लगा कि वह बाहर जाना चाहते हैं। कोतवाल हिमांशु निगम ने मौलाना को रोकने की कोशिश की तो नीचे उतरने के दौरान धक्कामुक्की हो गई। इससे मौलाना के समर्थक उग्र हो गए। तभी अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कोतवाल को डीएम का नजरबंदी आदेश पढ़कर सुनाया जिसमें जिक्र था कि पुलिस घर के बाहर ही रहेगी। तब कोतवाल से पूछा कि आप लोग कैसे घर में घुस आए हैं, बाहर रहकर अपनी ड्यूटी कीजिए।
कोतवाल ने कहा कि वह लोकसेवक हैं और अपने अधिकारियों के निर्देश का पालन कर रहे हैं। प्राचा काफी देर बोलते रहे पर कोतवाल ने मौलाना को नहीं जाने दिया। बाद में किसी ने बताया कि सामने बैठक में नमाज पढ़नी है तो पुलिस ने मौलाना को वहां जाने दिया।