मौलाना ने सपा पर साधा निशाना
दूसरी तरफ संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत बोर्ड भी काम करता रहा। 2004 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने एक नया एक्ट बनाया, जिसका नाम मदरसा एजुकेशन एक्ट रखा गया। सपा सरकार की तरफ से सबसे पड़ी गलती मदरसा शब्द को लाकर हुई। मदरसे का शब्द आते ही धार्मिक शिक्षा का नाम जुड़ जाता है चूंकि हमारा देश का ढांचा लोकतांत्रिक है। किसी भी धर्म को बढ़ावा देने का भारतीय संविधान में कोई भी प्रिंसिपल वसूल नहीं है, इसलिए जहां भी धार्मिक शिक्षा का नाम आएगा तो वहां पर हुकूमत की संस्थाएं जरूर सवाल खड़ी करेगी, बिल्कुल इसी तरह यहां पर भी मदरसों के बारे में सवाल खड़ा हुआ।
मौलाना ने कहा कि अब मदरसों पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इनको चलाना और बाकी रखना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। उन्होंने कहा कि मदरसों की दुर्दशा के लिए सपा की सरकार को जिम्मेदार मानता हूं। अगर सपा सरकार ने मदरसा एजुकेशन एक्ट नहीं बनाया होता और अरबी फारसी बोर्ड खत्म न किया होता तो आज ये दिन न देखने पड़ते। दूसरे नंबर पर मदरसों से वाबस्ता धार्मिक नेतृत्व भी जिम्मेदार है। महीनों चलने वाले कोर्ट की बहस में अपना वकील नहीं खड़ा किया। सही से पैरोकारी भी नहीं की गई। मदरसों की दुर्दशा में सिर्फ भाजपा सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता। धार्मिक नेतृत्व को भी जिम्मेदारी लेनी होगी।