मौलाना ने बोर्ड के जारी किए गए पत्र के संबंध में कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने असली मकसद से भटक गया है। बोर्ड का काम खालिस मजहबी व शरई मामलों में मुसलमानों की रहनुमाई करना है, मगर चंद वर्षों से ये देखा जा रहा है कि अपने मकसद पर काम न करके राजनीतिक मामलात में दिलचस्पी ज्यादा बढ़ गई है। देखा ये गया है कि जब भी लोकसभा के चुनाव करीब आते हैं तो बोर्ड किसी न किसी सियासी मुद्दे को लेकर सक्रिय हो जाता है।
असामाजिक तत्व बिगाड़ सकते हैं माहौल
मौलाना ने केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान इस तरफ दिलाया कि श्रीराम के नाम से शहरों और देहातों में जुलूस निकाले जा रहे हैं। जुलूस निकालना हर व्यक्ति का हक है, मगर इन जुलूसो में कुछ ऐसे असामाजिक तत्व शामिल हो जाते हैं, जो बाद में कहीं न कहीं मुसीबत का सबब बन जाते हैं। अभी जो जुलूस निकाले जा रहे हैं उनमें कई जगह से ये शिकायतें मिली हैं कि कहीं रास्ते में मस्जिद य दरगाह पड़ती है तो वहां रुक कर जोरशोर से नारेबाजी की जाती है। इसलिए सरकार को चाहिए कि इस पर ध्यान दें और भाजपा को ऐसे निर्देश जारी करना चाहिए जिससे अच्छे माहौल का वातावरण खराब न हो और अमन शांति बनी रहे।