बरेली में लड़के वालों को मुंहमांगा दहेज न दे पाने की कैंसर पीड़ित बहन की मजबूरी को नजरंदाज कर भाई ने उसे ऐसा धोखा दिया कि पहले ही तंगी से जूझ रहा परिवार और ज्यादा तबाह हो गया। बहन को बताए बगैर उसने लड़के का रिश्ता कहीं और तय करा दिया। शादी की तारीख पर बहन का परिवार सारी तैयारियां कर बरात का इंतजार करता रहा लेकिन बरात दूसरी जगह चली गई।
जोगी नवादा में रहने वाली अनिशा के मुताबिक उनकी बेटी निशा का रिश्ता उनके भाई आरिफ ने ही नवाबगंज के गांव हरदुआ में रहने वाले नासिर से तय कराया था। सारी बातचीत होने के बाद लड़के वालों ने 28 अक्तूबर को बरात लेकर आने को कहा था। उन्होंने बरात की खातिर के भी सारे इंतजाम कर लिए लेकिन तय दिन पर दोपहर तक बरात नहीं आई। घबराहट की स्थिति में उन्होंने और उनके रिश्तेदारों ने फोन किया तो नासिर के भाइयों ने दोपहर दो से तीन के बीच बरात लेकर पहुंचने की बात कही लेकिन इसके बावजूद शाम तक बरात नहीं पहुंची।
उनके परिवार के लोग हरदुआ में नासिर के घर पहुंचे तो वहां ताला पड़ा मिला। पड़ोस के लोगों ने बताया कि नासिर और उसके परिवार वाले बरात लेकर गांव जयनगर गए हुए हैं। वे लोग जयनगर पहुंचे तो वहां भी कोई नहीं मिला। वहां पता चला कि नासिर के परिवार ने जयनगर बरात लेकर जाने की अफवाह जरूर फैलाई थी लेकिन असल में बरात हाफिजगंज के गांव ढकिया गई है लेकिन ढकिया में भी न नासिर और उसका परिवार मिला न उसकी बरात आने की पुष्टि हुई।
अनिशा का कहना है कि काफी पूछताछ करने पर पता चला कि उनके भाई आरिफ ने ही साजिश के तहत नासिर के घरवालों से मिलकर निशा का रिश्ता तय कराया था। इसी साजिश के तहत दहेज में तीन लाख और बाइक की मांग की गई थी। यह मांग पूरी न कर पाने पर नासिर का उसी दिन आननफानन दूसरी लड़की से निकाह करा दिया गया। उन्हें रिश्ता तोड़ने की जानकारी तक नहीं दी। अनिशा ने थाना बारादरी में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में भाई आरिफ के साथ नासिर, उसके भाई शेर बाबू, अजमत शाह, पप्पू शाह, कमाल शाह, मेहसर शाह और कौशर शाह को नामजद किया है।
वह मेरा मामा नहीं, क्योंकि कोई अपनी भांजी के साथ ऐसा नहीं कर सकता
शादी की तारीख पर पूरे दिन दुल्हन बनी बैठी रही निशा भी अपने मामा की हरकत से सदमे में है। उसने कहा कि आज के बाद उसका कोई मामा नहीं है। आरिफ ने धोखा दिया है, कोई मामा अपनी भांजी के साथ ऐसा नहीं कर सकता। उसने बताया कि पिता सब्जी बेचते हैं। वह पांच बहनें हैं। तीन की जैसे-तैसे शादी हुई है। एक बहन उनसे दो साल छोटी भी है। दो भाई भी हैं। सारी जिम्मेदारी पिता पर ही है। उनके पास इतनी रकम तक नहीं है कि वे लोग मां का इलाज करा सकें। इसके बावजूद धोखाधड़ी कर उन्हें लाखों का और कर्जदार बना दिया गया।