बरेली। खाकी और खादी की सरपरस्ती में फले-फूले अपराधी व माफिया अब पुलिस पर ही भारी पड़ने लगे हैं। इन अपराधियों में पुलिस का खौफ लगभग खत्म हो चुका है। पीलीभीत बाइपास पर हुए गोलीकांड में कई ऐसे अपराधी शामिल रहे, जिनको खाकी और खादी ने ही संरक्षण दिया था।
नेता के वरदहस्त से राना ने खड़ा किया साम्राज्य
बेहद सामान्य परिवार के राजीव राना ने संबंधों के जरिये बेहद कम समय में करोड़ों रुपये की संपत्ति एकत्र कर ली। बेहद करीबी दोस्त के नेता बन जाने का पूरा फायदा राना ने उठाया। औरे-पौने दाम पर विवादित भूखंड खरीदने लगा। कब्जा करके बाद में उसे महंगे दाम में बेच देता था। बीडीए की जमीन कब्जाने में भी उसका नाम आया था। अपने रसूख और आका के दम पर उसने नाम निकलवा लिया। राजनीतिक रसूख के बल पर वह पुलिस को भी साध लेता था। हालिया मामले में भी राना ने पुलिस को साध लिया था, लेकिन आदित्य उपाध्याय के विरोध से मामला बिगड़ गया और गोलीबारी हो गई। पुलिस और राजनीतिक संरक्षण के बल पर राजीव स्थानीय बदमाशों का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करता था। अब पीलीभीत बाइपास पर हुए बवाल के मामले में वह मुख्य आरोपी है।
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शेरू यादव का खास गुर्गा ललित बन गया हिस्ट्रीशीटर
पुलिस ने मुठभेड़ में मठलक्ष्मीपुर निवासी जिस ललित सक्सेना को गिरफ्तार किया है, दस साल पहले वह इज्जतनगर में अवैध टेंपो स्टैंड चलाने वाले हिस्ट्रीशीटर शेरू यादव का खास गुर्गा था। शेरू यादव को तत्कालीन नेताओं व पुलिस का संरक्षण मिलता था। वर्ष 2015 में गोली मारकर शेरू की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सिलसिलेवार कई हत्याएं हुईं तो पुलिस ने अवैध स्टैंड बंद करा दिए। काफी दिनों तक इज्जतनगर रेलवे स्टेशन के बाहर दुकानों से रंगदारी मांगने में ललित का नाम आया था। ये दुकानें हटीं तो ललित भी लंबे समय तक गायब रहा। वर्ष 2021 में प्लॉट के विवाद में साथियों के साथ मिलकर ललित ने कुदेशिया पुल पर महिला नेता का सिर फोड़ दिया था। तब भी पुलिस ने उसे कोर्ट में सरेंडर की छूट दी थी। इसलिए ललित में पुलिस का खौफ खत्म हो गया था।
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केपी का जन्मजात पुलिस कनेक्शन, फिर बना सभासद
ललित के साथी रिठौरा निवासी केपी यादव ने अपने इलाके में रॉबिनहुड वाली छवि बना रखी है। इसकी वजह से वह दोबारा सभासद बन गया है। उसकी मां पुलिस विभाग में फॉलोअर हैं और जिले में ही तैनात हैं। ऐसे में केपी का बचपन से पुलिस से जुड़ाव है। उसके कई रिश्तेदार भी जिले में ही तैनात हैं जो उसके गुनाहों को छिपाने में मदद करते हैं। केपी पर करीब डेढ़ दर्जन मुकदमे हैं और वह हाफिजगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर है। पिछली सरकार में पुलिस और नेताओं के संरक्षण में वह खूब फला-फूला। वह हाफिजगंज क्षेत्र में विवादित भूखंडों में दखलंदाजी करता रहा। केपी कहने को रिठौरा का निवासी है पर उसकी गतिविधियों का केंद्र शहर के इज्जतनगर, प्रेमनगर व बारादरी थाने रहते हैं। इस गोलीकांड में उसी ने राजीव राना से 30 लाख रुपये में प्लॉट खाली कराने का ठेका लिया था।
रोहित ठाकुर को छुड़ाने थाने पहुंचे जनप्रतिनिधि
केपी और ललित का तीसरा साथी रोहित ठाकुर भी हिस्ट्रीशीटर है जो इस घटना में फायरिंग करता दिखा और बाद में आदित्य उपाध्याय की कार से टकराकर घायल हो गया। रोहित को भी नेताओं का संरक्षण प्राप्त था। वर्ष 2021 में जब रोहित को इज्जतनगर पुलिस ने एक मामले में गिरफ्तार किया था तब एक जनप्रतिनिधि उसके लिए पैरवी करने थाने पहुंच गए थे। विधायक के थाने में आने के कारण पुलिस बैकफुट पर आ गई थी। रोहित का महज शांतिभंग में चालान कर मामला निपटा दिया गया था। इसके बाद वह और बड़ी घटनाएं करने लगा। पुलिस ने उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किया पर नेताओं के संरक्षण की वजह से वह हमेशा बचता रहा। ब्यूरो