बरेली। लोकतांत्रिक देश में तकनीकी तौर पर मजबूती के बावजूद माफिया और माइनिंग पर अंकुश नहीं लग पाना बड़ा सवाल है। जियो टैगिंग, सेटेलाइट मैपिंग, ड्रोन के दौर में भी अगर माफियावाद पनप रहा है तो यह गवर्नेंस की कमी है, जो टेक्नोलॉजी गैप के तौर पर सामने आ रही है। यह किसी भी राष्ट्र के विकास में बाधक है। ये बातें पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रहित शासन करना भी अब चुनौती बन रहा है। अंग्रेजों ने जमींदारी प्रथा के जरिये इसे स्थायी बना दिया। भ्रष्टाचार दीमक की तरह लोकतंत्र को खोखला कर रहा है।
देश की सुरक्षा के लिए अहम बिंदु
सैन्य शक्ति की मजबूती, चीन-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, नक्सलवाद और साइबर अपराध से निपटने की चुनौती है। आंतरिक सुरक्षा के महत्व का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि चीन ने साल 2020 में इस पर 200 बिलियन डॉलर खर्च किए। पूरे विश्व में आंतरिक सुरक्षा पर हो रहा खर्च सैन्य खर्च से आधा है। हमारे देश को भी इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
लड़ाई, आतंकवाद से करीब चार
गुना ज्यादा मौतें दुर्घटनाओं में हुईं
उन्होंने बताया कि साल 2017 में लड़ाई में 89 हजार और आतंकवाद के चलते 26 हजार लोगों की जान गई। इससे करीब चार गुना ज्यादा 4.64 लाख लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई। यह आंकड़ा बताता है कि आंतरिक सुरक्षा कितनी अहम है। पंजाब में अमृतपाल सिंह के सहयोगियों ने अजनाला पुलिस स्टेशन में उत्पाद मचाया था। पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के वेब आ रहे हैं। इसमें हथियार और ड्रग भी आ रहे हैं। तस्कर सक्रिय हैं। आईएसआई फंडिंग भी हो रही है। अफगानिस्तान से मादक पदार्थों की तस्करी बढ़ी है। भारत में उसका स्टोरेज हो रहा है।
चीन से चल रहा विवाद पर कारोबार
बंद करना समस्या का समाधान नहीं
कहा कि पाकिस्तान से कोई खतरा नहीं, मगर चीन मानने को तैयार नहीं। साल 1916 में खींची गई मैक मोहन रेखा को लेकर विवाद है। चीन इसे नहीं मानता। दलाई लामा भी साल 1995 से इसी वजह से खिलाफ हैं। हम खिलाफ इसलिए हैं कि चीन ने ‘बीआरआई’ बनाई है जो मैकमोहन से गुरज रही है। चीन से सभी व्यापार बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। 2020 में गलवान में, 2021 में सिक्किम में, 2022 में तवांग में विवाद के बावजूद चीन से भारत का कारोबार बढ़ता गया। कुछ चीजें रोकी नहीं जा सकती हैं, लेकिन चीन से आने वाले उत्पादों की निगरानी जरूरी है।
कम हो रहा नक्सलवाद का दायरा
देश के 96 जिलों में फैला नक्सलवाद का दायरा अब 53 जिलों तक सिमट गया है। इनमें ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड के इलाके शामिल हैं। इसकी वजह है पैरामिलिट्री फोर्स की ओर से प्रभावी कार्रवाई किया जाना। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन सड़क, स्कूल, हॉस्पिटल आदि का निर्माण करा रहा है। मोबाइल टॉवर भी लग गए हैं। आंध्र प्रदेश अपराध नियंत्रण के लिए बेहद सराहनीय कार्य कर रहा है।