बरेली। गर्भावस्था के दौरान दायें करवट लेटना शिशु की जान के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इससे शिशु का रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। ये बर्थ एसफिक्सिया का एक कारण है। बीते दो माह में महिला अस्पताल में 20 नवजातों की मौत हुई। इनमें से आठ की मौत की वजह बर्थ एसफिक्सिया रही।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते दो माह में महिला अस्पताल में 20 शिशुओं की मौत दर्ज हुई है। इसमें चार मौतें संक्रमण से, तीन समय पूर्व प्रसव से व पांच अन्य वजहों से हुईं। आठ की मौत की वजह बर्थ एसफिक्सिया दर्ज है। यह जानकारी हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी एचएमआईएस पोर्टल पर अपलोड है।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रगति अग्रवाल के मुताबिक गर्भावस्था में दायें करवट लेटने से गर्भस्थ शिशु का रक्त संचार प्रभावित होता है। क्रोनिक बर्थ एसफिक्सिया की आशंका रहती है। गर्भ के दौरान इसका पता नहीं चलता। प्रसव के दौरान पता चलने तक काफी देर हो चुकी होती है। इंटर यूट्राइन ग्रोथ रिस्टि्रक्शन (आईयूजीआर) से भी शिशु के मस्तिष्क तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। बर्थ एसफिक्सिया की ज्यादातर आशंका सामान्य प्रसव में रहती है।
ये होती है परेशानी
बर्थ एस्फिक्सिया एक ऐसी अवस्था है जिसमें नवजात शिशु न तो रो पाता है और न ही सांस ले पाता है। मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी के कारण यह समस्या होती है। नवजात को तत्काल वेंटीलेटर के साथ-साथ बेहतर चिकित्सा की आवश्यकता होती है। इसमें लापरवाही पर जान जाने का खतरा रहता है। जान बच जाने पर भी नवजात के मंदबुद्धि होने की आशंका रहती है, जिसे सेरेब्रल पालसी कहते हैं।
जन्म से चार सप्ताह तक होती हैं सर्वाधिक मौतें
नेशनल रूरल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट के अनुसार जन्म के बाद चार सप्ताह तक नवजात शिशुओं को जान का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है। लिहाजा, इन चार सप्ताह में सर्वाधिक देखभाल की जरूरत होती है। शिशु मृत्युदर के आंकड़ों पर गौर करें तो पहले सप्ताह में 34.1, दूसरे सप्ताह में 12.6, तीसरे सप्ताह 8.6, चौथे सप्ताह में तीन फीसदी बच्चों की मौत होने की आशंका रहती है। ब्यूरो
बर्थ एसफिक्सिया की वजहें
- गर्भनाल छोटी होना या गले में फंसने पर रक्त प्रवाह थमना।
- गर्भावस्था में नियमित जांच न कराना। दायें करवट लेटना।
- रक्तचाप, डायबिटीज की जांच न कराना, प्लेसेंटा में खामी।
- प्रसव में जटिलता के बावजूद सामान्य प्रसव का दबाव बनाना।
- प्रसव के दौरान शिशु के सिर पर दबाव पड़ने से कठिनाई।
गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच न कराना समेत अन्य जटिलताओं की वजह से बर्थ एसफिक्सिया से प्रसव के दौरान शिशु की मौत हो जाती है। जो शिशु बच जाते हैं, वे सेरेब्रल पालसी की चपेट में रहते हैं। - डॉ. त्रिभुवन प्रसाद, सीएमएस महिला अस्पताल