खातों में ही भुगतान ले रहे थे धंधेबाज
लखनऊ पुलिस को विनोद के बरेली जेल में बंद होने की जानकारी मिली तो इस बात की तस्दीक कराई। अब लखनऊ पुलिस विनोद यादव का नाम मुकदमे में शामिल कर उसकी कस्टडी रिमांड लेने जा रही है। वहीं, इज्जतनगर इंस्पेक्टर अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि वह भी विनोद के खिलाफ दूसरे शहरों व थानों में दर्ज मामलों का पता लगा रहे हैं। सभी मामलों को जोड़कर चार्जशीट को मजबूत किया जाएगा ताकि आरोपी को आसानी से जमानत न मिल सके।
वेबसाइट के जरिये मान्यता देने का पूरा खेल ऑनलाइन किया जाता था। मान्यता देने के बदले खातों में भुगतान लिया जाता था। पुलिस ने बैंक खातों की जांच की तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पता लगा कि खुद को असली साबित करने और भरोसा जमाने के लिए धंधेबाज ऑनलाइन ही फीस आदि की वसूली करते थे। जांच के बाद ही साफ होगा कि आरोपियों ने कितने लोगों को चूना लगाया है।
सैकड़ों छात्र काट रहे कलक्ट्रेट के चक्कर
विनोद और उसका साथी जगदीश इंडियन पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट नाम से फर्जी संस्थान चलाते थे। 13 अप्रैल को इंस्टीट्यूट में ताला पड़ गया। विनोद और जगदीश को पुलिस ने जेल भेज दिया। इसके बाद से विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो गया। वे दूसरी जगह प्रवेश या फीस वापसी को लेकर कलक्ट्रेट व अन्य विभागों के चक्कर काट रहे हैं।
बरेली के सीओ तृतीय आशीष प्रताप सिंह ने बताया कि फर्जी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट चलाने वाले आरोपी जेल भेजे गए हैं। इज्जतनगर पुलिस विवेचना कर रही है। दूसरी जगह भी इन्होंने धोखाधड़ी की होगी तो उसकी जानकारी करके भी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।