बरेली। आनंद आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित विश्व मोहन ठाकुर ने रामकथा में रविवार को मनु शतरूपा की कथा सुनाई।
कथावाचक ने कहा कि अयोध्या के राजमहल में महाराज दशरथ के घर निर्गुण परात्पर ब्रह्म 4 रूप में प्रकट होकर राजमहल को सुशोभित किया। यह चारों वेद के प्रतीक हैं। सामदेव के प्रतीक श्रीराम, ऋग्वेद के प्रतीक भरत लाल, यजुर्वेद के प्रतीक लक्ष्मण व अथर्वेद के प्रतीक शत्रुघ्न महाराज हैं। गुरु वशिष्ठ ने चारों के गुण, स्वभाव व तेज को देखकर उनके नामकरण संस्कार किए। कौशल्या के लाल का नाम राम रखा जो सबको विश्राम देने वाला है और आनंद व सुख का सागर है। कैकेयी के लाल का नाम भरत रखा जो नाम की महिमा के अनुरूप विश्व का भरण पोषण करने वाला है। सुमित्रा के दोनों लाला का नाम क्रमशः लक्ष्मण व शत्रुघ्न रखा। कुछ समय बाद उनका चूड़ाकर्म (मुंडन) व यगोपवीत संस्कार और गुरुकुल पढ़ने गए। विश्वामित्र राम को ले गए तो वहां राक्षसों को खत्म किया और अहिल्या तारी। इसके बाद जनकपुर जाकर धनुष यज्ञ में शिव धनुष को तोड़कर सीता का वरण किया। कथा के दौरान नरसिंह मोदी, पंकज अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, अनिल गुप्ता, सर्वेश अग्रवाल, दिपेश खंडेलवाल, अरविंद शर्मा मौजूद रहे।