बरेली। शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। ये न सिर्फ आमजन के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं, बल्कि वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। वर्ष 2019 में हुई पशु गणना के मुताबिक जिले में 6972 पशु छुट्टा थे। जिले की 59 गोशालाओं में 10 हजार, 377 पशु रखे गए हैं। इसके अलावा करीब एक हजार सड़कों पर घूम रहे हैं। नगर निगम और ग्राम पंचायतें अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभा पा रहे हैं।
छुट्टा पशुओं की समस्या पर पशुपालन मंत्री ने 31 दिसंबर को विकास भवन में बैठक की थी। उस वक्त अफसरों ने जो आंकड़े बताए थे, उन्हें मंत्री ने झूठा बताया था। साथ ही पशु पालकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने 11 पशु पालकों पर एफआईआर भी दर्ज कराई थी। तीन महीने में एक हजार से अधिक छुट्टा पशु गो आश्रय स्थलों में भेजे गए, लेकिन अभी भी गल-मोहल्लों और प्रमुख मार्गों पर छुट्टा पशु के झुंड दिख रहे हैं। ग्राम पंचायत और नगर निगम के अधिकारी अभी तक छुट्टा पशुओं से निजात नहीं दिला पाए हैं।
शासन से विशेष सचिव आज आएंगे
विशेष सचिव कुमार प्रशांत बृहस्पतिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे विकास भवन में बैठक करेंगे। पशु चिकित्साधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और उप जिलाधिकारियों से छुट्टा पशुओं की समस्या पर फीडबैक लेंगे। शासन की नीति से अवगत कराएंगे।
कोट-
नगरीय क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में खंड विकास अधिकारियों और पशु चिकित्साधिकारियों की जिम्मेदारी है। बड़ी संख्या में छुट्टा पशु पकड़कर गो-आश्रय स्थलों में भेजे गए हैं, लेकिन अनुमान के मुताबिक जिले में एक हजार छुट्टा पशु घूम रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए अभियान चल रहा है। - जगप्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी
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सात नए गो आश्रय स्थल बनाने को मिली मंजूरी
बरेली। मुख्य विकास अधिकारी के मुताबिक जिले में सात नए वृह्द गो-आश्रय स्थल बनेंगे। एक गोशाला की लागत एक करोड़, 20 लाख रुपये होगी। शासन को दस नए गो आश्रय स्थल बनाए जाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसमें सात के लिए धनराशि जारी होने वाली है। इनके बनने से छुट्टा पशुओं को रखने के लिए स्थल बढ़ जाएंगे।