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लॉकडाउन ने चौपट किया ट्रांसपोर्ट कारोबार

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बरेली के ट्रांसपोर्ट नगर में खड़े ट्रक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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20 फीसदी भी नहीं मिल रहा काम, स्टाफ भी कोरोना से खौफजदा
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केवल जरूरी सामान की ही आवाजाही, जनता पर महंगाई की मार

बरेली। सरकार ने लॉकडाउन में ट्रांसपोर्ट को दायरे से बाहर तो रखा है पर ज्यादातर शहरों की मंडियां और फैक्टरी बंद होने से यह धंधा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ट्रक एक ओर से माल लेकर जाते हैं तो दूसरी ओर से बुकिंग मिलने में चार-पांच दिन लग जाते हैं। इससे जरूरी सामान आने में वक्त लग रहा है तो किराए पर भी फर्क पड़ा है। नतीजा यह हुआ है बाहर से आने वाली दाल, तेल, रिफाइंड जैसी चीजों पर महंगाई हावी होने लगी है। अमर उजाला ने इस धंधे की मौजूदा स्थिति की पड़ताल की तो कारोबारियों ने इसे सबसे बुरा वक्त करार दिया।

दूसरी ओर से खाली आ रहे ट्रक

ट्रांसपोर्ट कारोबार को सरकार ने लॉकडाउन से अलग तो रखा है पर परेशानियां बरकरार हैं। पहले हम जब बरेली से दूसरे प्रदेशों या शहरों को ट्रक, डीसीएम लोड करके भेजते थे तो वहां से परिचित दूसरी ट्रांसपोर्ट का सामान बरेली लाने के लिए मिल जाता था। अब दूसरी ओर से माल का ऑर्डर और लोड होने के इंतजार में गाड़ियां कई दिन खड़ी रहती हैं या फिर खाली आती हैं। व्यापारी भी सीमित ऑर्डर दे रहे हैं। आलम यह है कि पीलीभीत से जो आटा 36 रुपये प्रति क्विंटल के भाड़े में आता था वह अब ट्रांसपोर्टर 31 रुपये में बरेली पहुंचा रहे हैं। इससे प्रति गाड़ी करीब आठ सौ रुपये का नुकसान हो रहा है। - शोभित सक्सेना, अध्यक्ष, बरेली ट्रांसपोर्ट यूनियन

ड्राइवर-हेल्पर भी घरों में कैद, गाड़ियां खड़ीं

तेलंगाना भेजी गईं कई गाड़ियां अभी वहां माल लोडिंग के इंतजार में खड़ी हैं। मंडियां बंद होने से अनलोडिंग की समस्या भी आती है। हम लोगों की तरह ड्राइवर और स्टाफ को भी कोरोना से जान का खतरा है। वह तो दूसरे शहरों में खाक छानते हैं तो उन्हें संक्रमण की आशंका ज्यादा रहती है। इसलिए उनसे जाने की जिद नहीं कर सकते। रास्ते भर कहीं होटल, ढाबे खुले नहीं मिलते, इससे और ज्यादा परेशानी है। इन दिनों में केवल किराना का जरूरी सामान ही आ रहा है। सीजन में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स आइटम, एसी आदि की बड़ी मांग होती थी पर इन दिनों इनके उत्पादन से लेकर थोक मंडियां तक बंद हैं, जिसका असर सीधे तौर पर कारोबार पर पड़ा है। - हरीश बिग, अध्यक्ष, किला ट्रांसपोर्ट यूनियन

रिपेयर तक नहीं हो पा रहे वाहन

सारी मंडियां बंद होने से ट्रांसपोर्टरों का बड़ा नुकसान हो रहा है। धंधा चौपट होने से ट्रकों की सर्विस और मरम्मत तक नहीं हो करा पा रहे हैं। मैकेनिकों की दुकानें भी नहीं खुल रही हैं। सबसे बड़ी समस्या टायर न मिलने की है। सरकार ने हमें संचालन की छूट तो दी है पर जरूरी सेवा में मुश्किल से बीस फीसदी ट्रक चल रहे हैं। ऐसे में रोड टैक्स, बीमा, फिटनेस आदि का खर्च तो वाहन खड़े होने के बावजूद देना पड़ रहा है। यह सीजन का समय था, इन दिनों किसी को दस गाड़ियों की जरूरत होती थी तो हम कई ट्रांसपोर्टर मिलकर जुटा पाते थे, अब गाड़ियां खड़ी हैं और ऑर्डर नहीं हैं। - दानिश जमाल, ट्रांसपोर्टर, टीपी नगर

तेल-रिफाइंड के दाम पिछली साल के मुकाबले दोगुने, दालें भी उछाल पर

दूसरे शहरों की मंडियां और फैक्टरी बंद होने का सीधा असर शहर के बाजार पर दिखाई दे रहा है। यहां किराने का ही जरूरी सामान बेहिसाब महंगा हो गया है। कटरा में किराना दुकान चलाने वाले लक्ष्मी साहू ने बताया कि पिछले लॉकडाउन में सरसों का तेल 90 रुपये प्रति किलो था जो अब 160 से 180 रुपये तक मिल रहा है। इसी तरह रिफाइंड पिछली बार इन दिनों में 85 रुपये प्रति लीटर था जो अब 160 से 165 रुपये तक है। इसके अलावा अरहर, मूंग, मसूर की दालों का भाव भी 110 रुपये किलो चल रहा है जो पिछले लॉकडाउन में 70 से 85 रुपये किलो तक था। उड़द की दाल जो पहले 90 रुपये किलो थी, अब 120 तक जा पहुंची है। आटा और चावल काफी हद तक जिले में होने की वजह से इनके दाम फिलहाल नहीं बढ़े हैं। चीनी में केवल दो रुपये प्रति किलो का उछाल है। लक्ष्मी साहू ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ चीजें प्रिंट रेट से ज्यादा पर मार्केट में बेची जा रही हैं। उनका कहना था कि सामान की मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने से यह समस्या बनी है।
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