बरेली। मलेरिया और डेंगू से निजात के लिए चल रहे सर्वे में धान के खेतों में मच्छरों के लार्वा पनपते मिले हैं। खेतों में जलभराव से भी मच्छरों के हमले और बीमारियों की चपेट में आने की आशंका है। लिहाजा, किसानों को मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग को पत्र भेजा है।
बरेली मच्छरजनित रोगों में प्रदेश के अतिसंवेदनशील जिलों की सूची में शामिल है। बीते साल बरेली में मलेरिया के करीब 35 सौ मरीज मिले थे। डेंगू के मरीजों की तादाद भी हजार पार थी। अबकी साल इन बीमारियों से लोगाें को सुरक्षित करने के लिए कीटनाशक छिड़काव के बावजूद मच्छरों की तादाद कम क्यों नहीं हुई। इस बाबत सर्वे शुरू हुआ। स्वास्थ्य विभाग के एंटोमोलॉजिस्ट अभिषेक और मलेरिया विभाग की टीम ने अति संवेदनशील ब्लॉक भमोरा के दलीपुर, कीरतपुर, फतेहगंज के डलीपुर ग्राम पंचाय का निरीक्षण किया। जहां खेतों में लार्वा पनपते मिले।
बताया कि अब धान की बुआई शुरू है। खेतों में पानी लगाया जा रहा है। ऐसे में मच्छरों की खेतों में भरमार है। किसानों को खेत में जाने के दौरान फुल आस्तीन की शर्ट, पैंट पहनने, मच्छर से निजात के लिए क्रीम या लोशन का प्रयोग, धुंआ करने का सुझाव दिया जा रहा है।
बारिश के बाद मच्छरों का शुरू होगा हमला
अभिषेक के मुताबिक अभी तेज धूप के चलते मच्छरों की तादाद कम है, लेकिन बारिश होने या बादल मंडराने के साथ जब अधिकतम पारा 35 डिग्री के नीचे और न्यूनतम 22 डिग्री से ज्यादा दर्ज होता तब मच्छरों के पनपने का अनुकूल माहौल बनेगा। तब धान व अन्य फसलों की खेती शुरू होगी। मच्छरों की तादाद, हमला बढ़ने की आशंका है। कृषि विभाग को रोकथाम के लिए किसानों को जागरूक करने को कहा है।
तो इसलिए शहर से ज्यादा गांवों में हैं मरीज
खेतों में मच्छरों की फौज तैयार होने से गांवों में मलेरिया के मामले ज्यादा होने की भी एक वजह एंटोमोलॉजिस्ट मान रहे हैं। गांव में झाड़ियां, तालाब भी होते हैं। साथ ही, मच्छरजनित रोगों से बचाव के वैकल्पिक साधन भी कम प्रयोग करते हैं। बीते साल के आंकड़ों पर गौर करें तो देहात के 17 ब्लाॅकों के चार सौ गांव में डेंगू के मरीज मिले हैं। जबकि शहर के 18 वार्ड में ही मरीज मिले थे। अमर उजाला ब्यूरो