बरेली। पिछले दिनों स्वाइन फ्लू के दो मरीज मिलने के बाद अब जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की चपेट में एक बच्ची मिली है। लखनऊ पीजीआई अस्पताल से मिली सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची के घर पहुंचकर निरोधात्मक कार्रवाई की। मलेरिया विभाग की टीम ने बच्ची के घर समेत आसपास के इलाके में फॉगिंग और स्प्रे कराया। इधर, बारिश के बाद डेंगू और मलेरिया के केस भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक फरीदपुर के रम्पुरा रतन की रहने वाली 11 वर्षीय बच्ची के जेई से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। बच्ची वर्तमान में लखनऊ पीजीआई में भर्ती है। सप्ताह भर पहले बच्ची की तबीयत बहुत खराब हो गई थी। परिजनों ने निजी अस्पताल में जांच कराई तो उन्हें लखनऊ ले जाने की सलाह दी गई। पीजीआई में भर्ती कराने के बाद जांच में बच्ची की रिपोर्ट जेई पॉजिटिव मिली। फरीदपुर एमओआईसी डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक जेई पीड़ित बच्ची की सूचना उन्हें प्राप्त हुई है पर अभी तक कोई लिखित रिपोर्ट नहीं मिली है। एहतियातन निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
जापानी बुखार के लक्षण और बचाव
डॉ. गौतम ने बताया कि र्जेई (मस्तिष्क ज्वर) होने पर बच्चे की मानसिक क्षमता पर असर पड़ता है। सोचने, समझने और सुनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। तेज बुखार के साथ उल्टी होती है। जेई का वायरस एक से 15 साल की उम्र के बच्चों को ही ज्यादा गिरफ्त में लेता है क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्हें सुरक्षित करने के लिए जेई के टीके लगाए जाते हैं। मुख्य लक्षण तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, सिर दर्द, घबराहट, ठंड से कंपकपी रहती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
दो स्वाइन फ्लू, दो डेंगू और 1335 मलेरिया के केस
जिले में मलेरिया की रोकथाम के लिए टीमें लगातार संदिग्ध लोगोें के कार्ड टेस्ट कर रही हैं। मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1.94 लाख जांच हो चुकी है। इसमें मलेरिया के 1335 केस में से वाइवैक्स के 1150 और फेल्सीपेरम के 185 केस मिल चुके हैं। डेंगू के अब तक दो केस ट्रेस हो चुके हैं। स्वाइन फ्लू के दो मामले में एक सिविल लाइंस और दूसरा कूर्मांचल नगर परतापुर सहाय के बुजुर्ग पीड़ित मिले हैं। हालांकि, अब तक किसी की मौत की सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रित में होने का दावा किया है।