शहामतगंज पुल पर उड़ती पतंगों के मांझे से लोगों के घायल होने के बाद एक और मांझा चर्चा में आया है, जिस मांझे को धार देने के लिए कारीगर बारूद का इस्तेमाल करते हैं। बेहद खतरनाक यह मांझा चायनीज (सिंथेटिक ) मांझे की तरह नुकसान पहुंचाता है। किला के बाकरगंज और जखीरा में बनने वाले इस मांझे के नाम भी बारूद पर रखे जाते हैं। मसलन, आरडीएक्स, एके 47, खूनी मांझा, आसमानी धमाका, ब्लेड जैसी धार वाला मांझा। महिला सिपाही की गर्दन कटने के बाद चायनीज मांझे के साथ यह मांझा भी पुलिस के निशाने पर आया है। किला थाने के प्रभारी कमलकांत वर्मा के मुताबिक बाकरगंज और जखीरा में यह मांझा तैयार करने वाले जाकिर खरगोश, यासीन छुटका, फरीद बेग, मकमूद, तौफीक सहित आधा दर्जन कारीगरों के नाम सामने आए हैं। जल्द उनसे पूछताछ की जाएगी। पुलिस-प्रशासन की बैठकों में भी इस मांझे की चर्चा हो चुकी है, लेकिन कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब चायनीज मांझे के साथ इस मांझे पर भी कार्रवाई होनी है।