बरेली। अपने ही बच्चों की हत्या करने वाली मां को अपर सत्र न्यायाधीश तबरेज अहमद की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। भुता थाना क्षेत्र के मटकापुर निवासी बंटू ने 12 नवंबर 2021 को लिखाई गई रिपोर्ट में बताया कि साढ़े छह साल पहले बिहार के जिला हजारीबाग निवासी जयंती से उसने शादी की थी। दोनों के चार बच्चे (तीन बेटियां और एक बेटा) हुए। जयंती को बिना वजह गुस्सा आ जाता था। वह बच्चों को बहुत मारती थी। एक दिन उसका बंटू से झगड़ा हुआ तो लकड़ी काटने वाला बांका लेकर उसे दौड़ा लिया। इस पर वह बेटी ममता को लेकर अपने पुश्तैनी मकान में सोने चला गया।
सुबह वह अपने घर वापस आया तो दरवाजा अंदर से बंद था। जयंती को आवाज लगाया तो वह अंदर से बोली कि उसने बच्चों को मार दिया है। इस पर गांव के लोग जुट गए। बड़ी मुश्किल से दरवाजा खोला तो देखा कि उसके बेटे बालकिशन व बेटी कोमल की लाश चारपाई पर पड़ी थी। जयंती ने दोनों बच्चों को गला दबाकर मार दिया। संयोग से उस दिन उनकी बड़ी बेटी सुनीता बुआ के घर गई थी।
अभियोजन की ओर से सरकारी वकील सचिन जायसवाल ने आठ गवाह पेश किए। कोर्ट ने जयंती को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।