कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में एक डुबकी लगाने से कुंभ स्नान के समान फल प्राप्त होता है। स्कंद पुराण, नारद पुराण और पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में ऐसी मान्यता है। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान शनिवार को है। यह स्नान शुभ मुहूर्त में किया जाए तो ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिषविद् आचार्य रमाकांत दीक्षित ने बताया कि वैसे तो स्नान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए, न हो सके तो सुबह 7.49 से 9.11 बजे तक का समय स्नान दान के लिए उत्तम है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा का मान पूर्वाह्न 11.25 तक ही है। इसके बाद प्रतिपदा लग जाएगी, मगर उदया तिथि में पूर्णिमा होने के कारण पूरे दिन पूर्णमासी ही मनाई जाएगी, इसलिए पूरे दिन स्नान किया जा सकता है। वहीं, आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया स्नान देवताओं को प्रसन्न और पितरों को तृप्त करता है। गंगा तट पर या तुलसी के पौधे के पास किया गया दीपदान पापों का शमन कर वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
स्नान के बाद करें ये कार्य
- भगवान विष्णु की आराधना करें।
- खिचड़ी, आंवला, खीर, घी, वस्त्र, गहने और कांसे की कटोरी में दीपक जलाकर ब्राह्मण को दान करें।
- पूरे दिन या एक प्रहर तक व्रत जरूर रखें।
- इस दिन नमक का सेवन करने से बचें।
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें।