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कारस्तानी : वित्तीय वर्ष के अंत में कागजात के बिना ही सालभर के 18 लाख रुपये का भुगतान

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बरेली। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने बिलों के भुगतान में खूब मनमानी की है। वर्ष 2020-21 में स्वास्थ्य विभाग ने आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम) के तहत वाहनों को अनुबंध पर लिया था। सालभर संचालन के बाद वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पहले मार्च में दो किस्तों में 18 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। सबसे अहम बात यह है कि इस भुगतान के लिए आवश्यक दस्तावेजों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। ऐसे ही एक अन्य मामले में एक ही दिन, एक ही वाहन से तीन जिलों का ई-वे बिल तक जारी करने की कारस्तानी सामने आई है।
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अब ऑडिट रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के कारनामे सामने आए हैं। वाहनों के बिल भुगतान में अनियमितता के साथ ही सर्जिकल सामानों की आपूर्ति में भी खेल की आशंका जताई है। ऑडिट रिपोर्ट में पता चला है कि भुगतान से पहले टेंडर के नवीनीकरण, जीपीआरएस, वाहनों के मूल दस्तावेज की कॉपियां नहीं लगाई गईं। एक ही दिन आठ मार्च 2021 को दो किस्तों में 18,36,097 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
वहीं, एक ही दिन, एक ही वाहन से तीन जिलों हापुड़, बिजनौर, गाजियाबाद की फर्मों से सर्जिकल सामान की आपूर्ति दिखाई गई। 13 अक्तूबर से 26 अक्तूबर के बीच 10.32 लाख का वर्क ऑर्डर हुआ। ई-वे बिल भी इसी दिन का बना। प्रकरण में ऑडिट टीम ने गड़बड़ी की आशंका जताई है।
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बाजार मूल्य से ज्यादा कीमत में खरीदे सर्जिकल सामान
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान जेम पोर्टल से ग्लब्स, सर्जिकल ग्लब्स, सेनेटरी पैड, यूरिन स्टि्रप, ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्टि्रप, यूरिन कंटेनर, एचबी मीटर स्टि्रप, एन 95 मास्क, सर्जिकल मास्क आदि खरीदने में भी मानकों की अनदेखी हुई। दो फर्म को बगैर दस्तावेजों के क्रमवार 2.66 लाख और 2.99 लाख रुपये का भुगतान किया गया। ऑडिट में बाजार मूल्य से ऊंची कीमत में सामान खरीदारी की पुष्टि हुई।

पांच गुना कीमत पर हुआ बुकलेट, स्टीकर का प्रकाशन
दस्तावेजों की छानबीन में पता चला है कि कोरोना महामारी के दौरान जागरूकता के नाम पर भी जमकर खेल किया गया। बुकलेट, स्टीकर, बैनर, होर्डिंग्स आदि को भी बाजार मूल्य से चार-पांच गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। रिपोर्ट के अनुसार घटिया किस्म के कागजों पर महंगे दर पर छपाई कराई गई। बिल भुगतान भी हो गया।

वर्जन
ये प्रकरण मेरे कार्यकाल के नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट का जवाब तैयार कराया जा रहा है। जब तक पूरा मामला जानकारी में न आ जाए, प्रकरण समझ न लूं, कुछ बता नहीं सकता। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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