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दौलत से इतना प्यार.. फूल सिराना भूले मगर मृत्यु प्रमाण पत्र लेना नहीं

बरेली ब्यूरो Updated Tue, 17 Sep 2019 02:32 AM IST
बरेली। अपनी तमाम उम्र बच्चों की ख्वाहिशें पूरी करने में खपाने के बाद भी तमाम लोगों का ढलती उम्र में जिंदगी का सुकून छिन गया। मौत ने उन्हें चिर शांति बख्शी लेकिन औलाद उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी पूरी तरह नहीं निभा सकी। तमाम लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की अस्थियां लेने तो नहीं पहुंचे लेकिन श्मशान घाट से उनकी मृत्यु का प्रमाण पत्र हाथ के हाथ ले गए ताकि खुद को उनकी संपत्ति का अधिकारी साबित करने में कोई दिक्कत न हो। श्मशान भूमि संरक्षण समिति के पदाधिकारियों तो यहां तक दावा करते हैं कि करीब 60 फीसदी लोग ऐसे हैं जो अपने बुजुर्गों के अस्थि कलश यहीं भूल गए लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए कई चक्कर काटे और आखिरकार लेकर ही गए।
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शहर की संजयनगर, सिटी और गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि में सैकड़ों की तादाद में अस्थि कलश रखे हुए हैं। अनुमान के मुताबिक ऐसे अस्थि कलशों की संख्या तीनों श्मशान भूमि को मिलाकर डेढ़ हजार से अधिक होगी लेकिन इन अस्थि कलशों में से एक भी ऐसा नहीं है जिनके परिवार के लोग अपने बुजुर्ग की मृत्यु का प्रमाण पत्र लेना भूल गए हों।
संजय नगर श्मशान भूमि ट्रस्ट के महामंत्री महेंद्र पटेल के मुताबिक श्मशान भूमि से मिला मृत्यु प्रमाण पत्र ही तमाम कानूनी विवादों को निपटाने का आधार बनता है। मृत व्यक्ति के एकाउंट से रकम निकालने, संपत्ति के नामांतरण या नगर निगम से आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी श्मशान भूमि से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर ही बनता है। इसलिए 90 फीसदी लोग श्मशान भूमि के नियमों के मुताबिक आठ से दस दिन के अंदर मृत्यु प्रमाण पत्र लेने पहुंच जाते हैं। इनमें से ज्यादातर ऐसे होते हैं जो अस्थि कलश बाद में ले जाने की बात कहकह चले जाते और फिर कभी नहीं आते। उन्होंने बताया कि 2019 से अब तक 954 मृत लोगों का दाह संस्कार श्मशान भूमि में हुआ है। इसमें से 740 लोग मृत्यु प्रमाणपत्र लेने पहुंचे हैं लेकिन साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों ने अपने परिजनों के फूल सिराने की अब तक सुध नहीं ली है।
अब फूल सिराने श्मशान भूमि पहुंच रहे परिजन
श्मशान भूमि संचालन समिति के मुताबिक अमर उजाला की ओर से परिजनों के फूल सिराने की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद बड़ी संख्या में हर दिन लोग फूल लेने पहुंच रहे हैं। कहा, प्रकाशित खबरों ने मृत व्यक्तिओं के परिजनों को सोचने पर विवश किया है। लिहाजा अब वे लोग फूल लेने श्मशान भूमि पहुंच रहे हैं। संचालकों ने अमर उजाला की इस मुहिम को तहेदिल से सराहा है।
जो मृत्यु प्रमाणपत्र लेने नहीं आते वो गरीब
श्मशान भूमि की देखरेख करने वालों के मुताबिक करीब दस प्रतिशत लोग ऐसे भी होते हैं जिनका शवदाह तो होता है, लेकिन न ही उनके फूल सिराने कोई आता है और न ही मृत्यु प्रमाण पत्र लेने। संभावना जताई है कि ऐसे लोगों के नाम कोई प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस नहीं होता। इसलिए उनके मृत्यु प्रमाणपत्र की जरूरत भी नहीं होती। इसलिए शवदाह के बाद उनके परिजन उन्हें पूरी तरह से भुला देते हैं।
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