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जया किशोरी बोलीं, बिना स्वार्थ मित्रता का रिश्ता लंबा चलता है

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जया किशोरी - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। त्रिवटी नाथ मंदिर में सातवें कथा का प्रारंभ जया किशोरी ने राधे-राधे गोविंद राधे-राधे भजन के साथ किया। इस दौरान सुदामा के दरिद्रता से त्रस्त होकर पत्नी के आग्रह पर मथुरा पहुँचने का झांकी के साथ वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि मित्रता प्रेम स्वरूप बिना स्वार्थ के निभाई जाए तो वह रिश्ता बहुत लंबे समय तक चलता है। प्रेम को सबसे बड़ा बताकर उन्होंने अपने भजन ‘सबसे ऊंची प्रेम सगाई’ सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के 16108वें विवाह के बारे में संक्षेप में वर्णन करते हुए कहा कि भगवान हमें खुद ही रास्ता दिखाते हैं, वह हमें गलत और सही का भी आभास कराते हैं। राजा परीक्षित की मोक्ष की कथा के साथ शुक्रवार को कथा का विश्राम हो गया। इससे पहले फूलों की होली खेली गई। इस दौरान जया ने बरसाने की होली के गीत भी सुनाए। इसके बाद मुख्य यजमान राजेश मिश्रा ने रामसेवक भारद्वाज, अमित भारद्वाज, अतुल भारद्वाज, मृदुल कटिहा और पवन शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कथा में डीआईजी राजेश पांडेय, डॉ विवेक मिश्रा, मनमोहन सब्बरबाल, नवीन गोयल, पंकज अग्रवाल, श्रीमती सुनीता मिश्रा, विजय गोयल आदि मौजूद रहे।
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