मीरगंज/शीशगढ़। शीशगढ़ के गांव जिया नगला में युवक की हत्या कर पेड़ पर शव लटका देने के बाद शनिवार दोपहर से शीशगढ़-बहेड़ी रोड पर जाम लेकर बैठे ग्रामीणों को अफसर 18 घंटे बाद मना पाए। इसके बाद रविवार सुबह साढ़े सात बजे शव को सड़क से हटाकर अंतिम संस्कार किया गया। गांव में भारी तनाव के मद्देनजर दो कंपनी पीएसी के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।
गांव जियानगला के 23 वर्षीय युवक सुनील कुमार का शव शनिवार सुबह एक किलोमीटर दूर एक खेत में पेड़ पर लटका मिला था। सुनील का गांव की ही दूसरे संप्रदाय की एक लड़की से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस पर दोनों पक्षों में विवाद भी हो चुका था। सुनील के परिजनों ने उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया तो परिजनों के साथ तमाम ग्रामीण शनिवार दोपहर डेढ़ बजे शीशगढ़-बहेड़ी रोड पर जाम लगाकर धरने पर बैठ गए थे।
ग्रामीणों ने दोपहर बाद हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने करीब एक घंटे के लिए जाम खोला लेकिन इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घर पर बुलडोजर चलाने की मांग करते हुए फिर जाम लगा दिया। सुनील के शव को भी सड़क पर रख दिया। इस बीच शीशगढ़ पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। शाम को गांव पहुंचे सीओ, एसडीएम, एसपी देहात और एडीएम प्रशासन के काफी समझाने के बाद ग्रामीण जाम खोलने को तैयार नहीं हुए। रात में धरनास्थल पर जनरेटर मंगा लिया गया।
जिला मुख्यालय से पहुंचे अधिकारी तो रात को लौट गए लेकिन कई थानों की पुलिस के साथ सीओ बहेड़ी डॉ. तेजवीर सिंह रात भर सड़क पर डेरा डाले रहे।
सुवह पहुंचे सीओ आंवला अजय कुमार गौतम ने सुनील के परिजनों और ग्रामीणों को समझाया। कहा कि नामजदगी के आधार पर छह लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी तीनों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। तब कहीं ग्रामीण रोड से शव हटाने को तैयार हुए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोपहर 12 बजे अंतिम संस्कार किया गया।
आरोपी घर से भागे, पुलिस की
छावनी बना गांव जिया नगला
दो संप्रदायों के बीच का मामला होने की वजह से गांव में तनाव का माहौल है। इसी कारण जाम खत्म होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मृतक का अंतिम संस्कार होने तक गांव में डेरा डाले रहे। एहतियात के तौर पर गांव में दो कंपनी पीएसी के साथ भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।
शव घर पहुंचा तो मचा कोहराम
सुनील तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। मां कितुका देवी जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर सुधबुध खो बैठी हैं। एक सप्ताह पहले ही सुनील की शादी के लिए परिवार के लोग एक लड़की देखकर आए थे। फरवरी में उसकी शादी करने की तैयारी थी।
हत्या साफ थी, फिर भी पुलिस ने
आत्महत्या कहा तो भड़के ग्रामीण
सुनील का शव पेड़ से लटका मिलने के बाद एक तरफ उसके परिजनों के साथ गांव के लोग भी बुरी तरह आहत थे, दूसरी ओर हत्या के कई स्पष्ट संकेत होने के बावजूद शीशगढ़ पुलिस उसे आत्महत्या बताने पर अड़ी थी। इसी वजह से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा और इसके बाद शनिवार दोपहर से रविवार सुबह तक हालात प्रशासन के काबू से बाहर रहे।
गांव वाले पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठा रहे हैं। एक सुर में उनका कहना है कि पेड़ पर लटके सुनील के हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। उसकी चप्पल और मोबाइल का ईयर फोन भी घटनास्थल से 25 कदम दूर पड़ा हुआ था। उसी की बनियान उसके मुंह में ठुसी हुई थी। आत्महत्या करने वाला यह सब खुद कैसे कर सकता है।
गांव के लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस सुनील के उन सारे ऑडियो को नजरअंदाज कर रही है जिनमें वह कह रहा है, मुझे मत मारो। यही नहीं उसके परिवार के लोगों के आने से पहले ही पुलिस ने शव को सील कर दिया। छत्रपाल गंगवार, रामधुन लाल, तुलाराम, महेंद्र सिंह समेत कई लोगों ने कहा कि शीशगढ़ पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। लिहाजा किसी दूसरी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।