बरेली। पूर्वोत्तर रेलवे अपने पुराने डीजल रेल इंजन पड़ोसी देशों को बेचकर आय में इजाफा करेगा। स्क्रैप किए जाने वाले ये इंजन बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका की रेल पटरियों पर दौड़ेंगे। इज्जतनगर रेल कोच कारखाना में भी श्रीलंका भेजने के लिए दो इंजन तैयार किए जा रहे हैं।
इज्जतनगर रेल मंडल की सभी लाइनों का विद्युतीकरण हो चुका है। अब यहां विद्युत चालित इंजन का इस्तेमाल हो रहा है। डीजल इंजन चलन से बाहर हो गए हैं। रेलवे के पास काफी संख्या में पुराने डीजल इंजन हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा। वहीं, श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम और नेपाल में अब भी काफी संख्या में डीजल इंजनों का इस्तेमाल हो रहा है। एक डीजल इंजन की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये होती है। स्क्रैप में यह एक से डेढ़ करोड़ में ही बिकता है, लेकिन चालू हालत में बेचने पर ये छह से आठ करोड़ रुपये में बिक जाते हैं।
ऐसे में रेलवे ने चालू हालत के डीजल इंजनों को स्क्रैप कराने के बजाय पड़ोसी देशों को बेचने का निर्णय लिया है। श्रीलंका के लिए जीडी-11335 डब्ल्यूडीएम-3डी और जीडी-11346 डब्ल्यूडीएम-3डी सीरीज के दो इंजन भेजे जाने हैं। इससे पहले भी रेलवे बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका और नेपाल को कई पुराने डीजल इंजन की बिक्री कर चुका है।
रेलवे स्क्रैप के जरिये आमदनी बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। डीजल इंजनों का अब हमारे यहां न के बराबर इस्तेमाल हो रहा है। कुछ पड़ोसी देश पुराने डीजल इंजन खरीद रहे हैं। डिलीवरी के लिए बोर्ड के आदेश का इंतजार है। - राजेंद्र सिंह, पीआरओ