बरेली। किसानों को पशुपालन से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व बंगाल में तीन कृषक उत्पादक संगठन बनेंगे। पशुधन उत्पादन बढ़ाने के लिए पांच सीड विलेज समेत सूकर फार्मिंग पर चैटबोट विकसित होगा। साथ ही, कई नए कोर्स, किसान मेला, प्रदर्शनी आदि आयोजित की जाएंगी।
भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान में शुक्रवार को प्रसार परिषद की 25वीं बैठक (वित्तीय वर्ष 2024-25) में यह निर्णय लिया गया। संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि सीड विलेज के तहत बरेली में साहीवाल, रुहेलखंड में बकरी, मुक्तेश्वर में चौगरखा बकरी, पुणे (महाराष्ट्र) में उस्मानाबादी प्रजाति की बकरी के सीड तैयार होंगे। नई शिक्षा नीति के तहत वोकेशनल व सर्टिफिकेट कोर्स का शैक्षणिक कैलेंडर बनाने, इंटरफेस मीट आयोजित करने पर भी मंथन हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक कृषि शिक्षा डाॅ. यूके गौतम ने सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर दिया जोर
संस्थान के निदेशक डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग शोध संस्थान (अटारी) के नियंत्रण में स्थित 731 कृषि विज्ञान केंद्र आईवीआरआई के संपर्क में हैं। प्रगतिशील किसानों का भी नेटवर्क विकसित किया गया है। डाॅ. रूपसी तिवारी ने बताया कि आगामी वर्ष में 16 इंडस्ट्री इंटरफेस मीट, 62 वोकेशनल व सर्टिफिकेट कोर्स, आठ किसान मेला, किसानों के लिए साहित्य, 22 प्रदर्शनी आयोजित होंगी। ऑल इंडिया रेडियो से 30 एपिसोड वाली दो कृषि पाठशालाएं प्रसारित होंगी। संस्थान के यू-टयूब चैनल पर भी किसानों, पशुपालकों को वीडियो के जरिये जानकारी दी जाएगी।
ये रहे मौजूद
डाॅ. हंस राम मीणा, डाॅ. शांतनु कुमार दुबे, डाॅ. केपी सिंह, डाॅ. एसके सिंह, डाॅ. एसके मेंदीरत्ता, डाॅ. जी साईं कुमार, डाॅ. अमरपाल, डाॅ. मंडल, डाॅ. पी. धर, डाॅ. मुकेश सिंह, डाॅ. अनुज चौहान, डाॅ. बबलू कुमार व अन्य लोग मौजूद रहे।