बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की रामगंगा रिवर फ्रंट परियोजना के लिए सिंचाई विभाग ने जमीन देने से मना कर दिया है। बीडीए के अधिकारी अब उन विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें सिंचाई विभाग की जमीन लिए बगैर परियोजना को धरातल पर उतारा जा सके।
लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर रामगंगा नदी के किनारे पार्क, पिकनिक स्पॉट विकसित करने और शहरवासियों को नौकायन कराने की मंशा से मंडलायुक्त ने सालभर पहले बीडीए से रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी कराई थी। बीडीए के अभियंताओं ने 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। बीडीए के उपाध्यक्ष ने सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति मांगी थी।
जिस जमीन पर रिवर फ्रंट को आकार दिया जाना है, वह सिंचाई विभाग की है और उसकी ओर जाने के लिए पीडब्ल्यूडी की सड़क है। पीडब्ल्यूडी ने कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन सिंचाई विभाग ने एनओसी देने से इन्कार कर दिया। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि बीडीए ने जिस जमीन पर रिवर फ्रंट प्रस्तावित किया है, वहां रामगंगा बैराज परियोजना के लिए निरीक्षण भवन, कंट्रोल रूम तथा आवासीय कॉलोनी प्रस्तावित है। इसलिए जमीन को किसी अन्य उपयोग के लिए देना संभव नहीं है। इसलिए बीडीए अब नदी किनारे स्थित किसानों की जमीन लेकर रिवर फ्रंट विकसित करने के विकल्प और उस पर आने वाले खर्च का आकलन कर रहा है।
बीडीए ने जो जमीन मांगी, सिंचाई विभाग ने उसे खरीदा था
बीडीए ने रामगंगा नदी के किनारे बसे मवई ठाकुरान गांव के जिन दस गाटा संख्या की जमीन को रिवर फ्रंट के लिए मांगा था, उस जमीन को सिंचाई विभाग ने रामगंगा बैराज परियोजना के लिए किसानों से खरीदा था। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि जमीन देना राजकीय हित में नहीं है। उनके मुताबिक, रामगंगा परियोजना केंद्रीय जल आयोग के पास विचाराधीन है। बजट मिलने की उम्मीद है।
कोट
सिंचाई विभाग ने जमीन देने से इन्कार किया है। अब रिवर फ्रंट के प्रारूप में बदलाव हो सकता है। जरूरत पड़ने पर बीडीए दूसरी जमीन ले सकता है। इस बारे में आकलन किया जा रहा है। निष्कर्ष के आधार पर कदम आगे बढ़ेंगे। - योगेंद्र कुमार, सचिव, बीडीए