बरेली। जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के एक मामले में दो अभियुक्तों के नाम हटाने के लिए 50 हजार रिश्वत लेते प्रेमनगर थाने के दरोगा रामौतार को गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक रामौतार ने कुल पांच लाख रुपये मांगे थे। इसी रकम की पहली किस्त लेते समय उसे रंगेहाथ पकड़ा गया।
किला थाने की मिर्धान गली निवासी हरीश अग्रवाल की तरफ से फर्जी कागजों के जरिये जमीन का इकरारनामा करने और फर्जी कागजों से खाता खोलने का आरोप लगाकर धोखाधड़ी की रिपोर्ट किला थाने में दर्ज कराई गई थी। मुकदमे की विवेचना प्रेमनगर थाने ट्रांसफर कर दी गई। मुकदमे से उत्तराखंड के मूल निवासी व यहां दुर्गानगर में रह रहे उमेश उपाध्याय व क्यारा निवासी रेखा रानी के नाम निकालने के बदले प्रेमनगर थाने के दरोगा रामौतार ने पांच लाख रुपये मांगे थे।
रुपये न देने पर जेल भेजने की धमकी दी। वह इन लोगों को लगातार कॉल और मेसेज कर रहे थे। उमेश ने दरोगा से रिश्वत 10 किस्तों में लेने का निवेदन किया था। दरोगा इस पर तैयार हो गया। मंगलवार रात वादे के मुताबिक उमेश पहली किस्त के 50 हजार रुपये देने नरियावल स्थित दरोगा के किराये के कमरे पर पहुंचे।
उमेश और रेखा पहले ही विजिलेंस के एसपी अरविंद कुमार से शिकायत कर चुके थे। इसलिए पीछे से सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के बरेली सेक्टर की टीम भी पहुंच गई। टीम ने दरोगा रामौतार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दरोगा के खिलाफ विजिलेंस थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। ब्यूरो