शहादत स्थल पर बना शहीद स्तंभ
क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला। अंग्रेजी हुकूमत की अदालत ने नवाब खान बहादुर खान समेत सभी को मौत की सजा सुनाई। 24 फरवरी 1860 को खान बहादुर खां को फांसी दी थी। जबकि 257 क्रांतिकारियों को कमिश्नरी स्थित बरगद के पेड़ से लटकाकर फांसी दी गई थी। दस्तावेजों के मुताबिक जिस पेड़ पर फांसी दी गई थी, वह सूख चुका है। वर्तमान कमिश्नरी कार्यालय के परिसर स्थित बरगद के पेड़ पर शहीद स्तंभ बना है, जिसका लोकार्पण 22 जुलाई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था।
पुरानी कोतवाली पर नवाब खान बहादुर खान को दी थी फांसी
नवाब खान बहादुर खां को पुरानी कोतवाली पर बेड़ियों से बांधकर फांसी दी गई थी। पुरानी कोतवाली जर्जर हो चुकी है और वहां दुकानों ने निर्माण कार्य करा लिया है। हालांकि, जर्जर भवन के कुछ निशान अब भी मौजूद हैं। फांसी देने के बाद पुरानी जिला जेल में बेडियों के साथ ही नवाब खान बहादुर खान को पुरानी जिला जेल में दफनाया गया था। जेल के गेट पर उनकी मजार है, जो पहले जेल के अंदर हुआ करती थी।