बरेली। नगर निगम के निर्माण विभाग के एक्सईएन पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए ठेकेदार ने आईजीआरएस पर शिकायत की तो उच्चाधिकारियों ने इसकी जांच भी उन्हीं को सौंप दी। आरोप है कि एक्सईएन ने गलत रिपोर्ट लगाकर मामले का निस्तारण कर दिया। अधिशासी अभियंता पर कोर्ट से स्टे लाने में खर्च हुई रकम की वसूली करने का आरोप भी लगाया गया है।
कुर्मांचलनगर निवासी अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 40-40 क्विंटल लकड़ी की आपूर्ति के लिए नगर निगम की ओर से वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। इसके बाद उनकी फर्म ने 15 जनवरी तक लकड़ियों की आपूर्ति की। अमित के मुताबिक एक दिन रात 10 बजे एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला उनकी टाल पर आए। उनसे कहा कि आपूर्ति जारी रखें। अतिरिक्त लकड़ी जाएगी तो उसका भुगतान बाद में कर देंगे। इसके बाद उनकी फर्म ने तीन फरवरी तक लकड़ियों की आपूर्ति की।
अमित के मुताबिक, इस मामले में एई और जेई ने भी वर्क ऑर्डर बनाकर लकड़ियों का बिल और अतिरिक्त लकड़ी के कोटेशन की फाइल बनाकर अधिशासी अभियंता को दे दी। इसके बाद फाइल पास करने के लिए उनसे मोटी रकम मांगी जाने लगी। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसकी शिकायत की तो अधिशासी अभियंता को ही मामले की जांच दे दी गई। उन्होंने खुद की जांच कर गलत रिपोर्ट लगाकर मामले का फर्जी निस्तारण दिखा दिया। अब अमित ने मामले की दोबारा जांच कराकर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मैं चाहूं तभी भुगतान हो सकता है...
अमित ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत में बताया है कि एक्सईएन डीके शुक्ला ने उन्हें बुलाया और कहा कि तुम्हारी रकम ज्यादा है। मैं चाहूं तभी भुगतान हो सकता है। इसके बाद एक्सईएन ने कहा कि कोर्ट से स्टे लाने में काफी खर्च हो गया है। उन्होंने रिश्वत नहीं दी तो आपत्ति लगाकर उनका भुगतान रोक दिया। उन्होंने नगर आयुक्त को भी पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिशासी अभियंता ने साध ली चुप्पी
अब अधिशासी अभियंता डीके शुक्ला ने चुप्पी साध ली है। दो दिनों से उनका पक्ष लेने के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन वह कार्यालय में भी नहीं मिले। उन्होंने फोन कॉल भी रिसीव नहीं की। एक बार रिसीव किया तो हेलो.. हेलो.. हेलो कर काट दिया। अधिशासी अभियंता को मेसेज भी भेजे गए पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। संवाद
निर्माण विभाग का मामला होने की वजह से जांच कराकर रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - निधि गुप्ता वत्स, नगर आयुक्त