बरेली। इदरीश हत्याकांड में पुलिस की कहानी अदालत में बिखर गई। 30 साल मुकदमा चला। इसके बाद भी पुलिस असली कातिल तक नहीं पहुंच सकी। यह तक पता नहीं चल सका कि जिस कंकाल को इदरीश का बताया जा रहा है, वह आदमी का है या औरत का।
हाफिजगंज के रहने वाले इदरीश का कंकाल 25 अगस्त 1994 को भोजीपुरा के पचदौरा में मिलने का दावा किया गया था। इसके बाद भोजीपुरा थाने में उसकी हत्या का मुकदमा नवाब हुसैन, शरीफल, नायाब हुसैन के खिलाफ दर्ज कराया गया। भोजीपुरा पुलिस ने आधी-अधूरी विवेचना कर आरोपपत्र कोर्ट में भेज दिया। अदालत में जब बहस हुई तो पुलिस कई सवालों के जवाब नहीं दे सकी।
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता अमजद सलीम ने बताया कि 10 अगस्त 1994 को इदरीश को गायब कर हत्या की बात कही गई। 25 अगस्त 1994 को लाश बरामद हो गई। 15 दिन में लाश इस कदर कंकाल बन गई कि उसकी सारी हड्डियां तक नहीं मिल सकी। पुलिस ने यह पता करने की कोशिश नहीं की कि आखिर रईस को भाई के शव के भोजीपुरा में पड़े होने की जानकारी कैसे हुई? उधर, बीमा पॉलिसी के तथ्य ने पूरे मुकदमे का रुख ही मोड़ दिया। पुलिस ने इस तथ्य को छुआ तक नहीं। वर्ष 2004 में अभियोजन की तरफ से सीआरपीसी 321 के तहत मुकदमे को वापस लेने के लिए कहा गया था, लेकिन अदालत ने इजाजत नहीं दी।