बरेली। वेबसाइट में बदलाव के बाद हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) में फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई है। अब तक संदिग्ध एचएसआरपी के कई मामले सामने आ चुके हैं। परिवहन विभाग ने इसकी मॉनीटरिंग शुरू कर दी है।
जिले में 9.50 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। वर्ष 2019 के बाद खरीदे जाने वाहनों के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ ही एचएसआरपी दी जा रही है। इससे पहले खरीदे गए वाहनों के लिए भी एचएसआरपी अनिवार्य कर दी गई है। परिवहन विभाग की ओर से अधिकृत वेबसाइट से मिलती-जुलती कई अन्य वेबसाइट होने की वजह से लोगों को भ्रम हो रहा था। इसकी शिकायतों के बाद विभाग ने वेबसाइट में बदलाव किया।
नई वेबसाइट पर काफी संख्या में पुराने वाहनों का डाटा अपलोड नहीं हो सका। धंधेबाज इसका फायदा उठा रहे हैं। संदिग्ध एचएसआरपी व फर्जीवाड़े की शिकायतों का संज्ञान लेकर परिवहन आयुक्त ने इसकी मॉनीटरिंग शुरू करा दी है।
आरटीओ की कार का भी नहीं दिख रहा डाटा
आरटीओ प्रशासन कमल प्रसाद गुप्ता की कार की एचएसआरपी पुरानी वेबसाइट से बुक की गई थी। नई वेबसाइट पर उनकी कार का डाटा भी नहीं दिख रहा। अधिकारियों ने काफी प्रयास के बाद इसमें सुधार कराया। अब भी काफी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिनका एचएसआरपी डाटा नई वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं हो रहा।
30 जून को खत्म हो चुकी समयसीमा
वाहनों पर एचएसआरपी लगवाने की समयसीमा 30 जून को खत्म हो चुकी है। अब बिना एचएसआरपी वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ऐसे में इन दिनों एचएसआरपी की बुकिंग में तीन गुना तक इजाफा हुआ है। 30 जून से पहले तक जहां रोजाना पुराने वाहनों के लिए 80-90 एचएसआरपी बुक कराई जा रही थीं, अब यह संख्या 200-250 तक पहुंच गई है। अमूमन, बुकिंग के 15-20 दिन बाद आने वाली एचएसआरपी इन दिनों महीने भर बाद आ रही है। संवाद
वेबसाइट में बदलाव के बाद कुछ वाहनों का डाटा नई वेबसाइट पर अपडेट नहीं हो सका है। ऐसी एचएसआरपी असली हैं, लेकिन डाटा न मिलने के कारण वह भी संदेह के घेरे में आ रही हैं। इनकी जांच कराई जा रही है। मिलती-जुलती वेबसाइटों की उच्चस्तर से निगरानी की जा रही है। - मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन