बरेली। जीआईएस सर्वें में आई गड़बड़ियों की वजह से लोग गृहकर नहीं जमा कर पा रहे हैं। इससे नगर निगम की आय रुक गई है। बीते साल अप्रैल से जुलाई तक जितना कर जमा हुआ था, इस साल उसका दस फीसदी भी नहीं जमा हो पाया। ऐसे में विकास कार्य भी अवरुद्ध होने की आशंका है। इसको लेकर पार्षदोें ने भी चिंता जताई है। नगर निगम के जिम्मेदार गड़बड़ियों को जल्द ठीक कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह काम बहुत धीमा चल रहा है।
दरअसल, जीआईएस सर्वे से पहले नगर निगम क्षेत्र में 1.80 लाख करदाता थे। सर्वे के बाद 2.40 लाख भवन गृहकर के दायरे में आ गए। वर्ष 2023-24 में 55-60 करोड़ रुपये गृहकर जमा हुआ था। वर्ष 2023 में अप्रैल से जुलाई तक ही 10-12 करोड़ रुपये कर जमा हो गया था। इस साल अप्रैल से अब तक सिर्फ 70-80 लाख रुपये ही गृहकर जमा हुआ है।
विकास कार्याें में भी आएगी बाधा
दरअसल, 50 लाख तक के काम नगर निगम अपनी निधि से कराता है। टैक्स आदि से मिली धनराशि विकास कार्यों में लगाई जाती है। शहर के 80 वार्डाें में नाले-नालियों और सड़कों का निर्माण नगर निगम की निधि से होता है। हाल में 30 लाख तक के कामों के टेंडर निकाले गए हैं और 50 लाख तक के कार्याें की सूची का परीक्षण किया जा रहा है। ये कार्य नगर निगम निधि से होने है। टैक्स जमा करने की स्थिति यही रही तो इन कार्यों में रुकावट आ सकती है।
आवासीय भवन को बना दिया व्यावसायिक
बजरिया पूरनमल के रहने वाले राजेश कुमार, राजीव कुमार, विजय कुमार और किशन अवतार के नाम से आने वाले आवासीय बिल को व्यावसायिक बना दिया। आवासीय भवन का टैक्स 1,129 रुपये आता था। अब 80 प्रतिशत बढ़कर 15,158 रुपये आ रहा है। कई बार नगर निगम के चक्कर काटने के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
छोटी सी दुकान को दर्शाया तीन मंजिला
जीआईएस सर्वे में रोडवेज पर स्थित मंसूर हुसैन की छोटी सी दुकान को तीन मंजिला दर्शाया है। उनका बिल भी 518 रुपये की जगह 27,239 रुपये आया है। मंसूर हुसैन के मुताबिक इस बिल को ठीक कराने के लिए एक माह से दौड़ रहे हैं। आपत्ति दर्ज कराई, तब एक माह बाद शनिवार को ही संशोधन करने के लिए नगर निगम से कर्मचारी आया। संवाद
गृहकरों से जुड़ी समस्याओं को लेकर लगातार अधिकारियों से कहा जा रहा है। निस्तारण में अगर ढील दी जा रही है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर