डॉ. लवलेश दत्त
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डॉ. लवलेश दत्त का उपन्यास एमए पाठ्यक्रम में शामिल
शाहजहांपुर। बरेली शहर के ग्रीन पार्क निवासी युवा लेखक डॉ. लवलेश दत्त का ट्रांसजेंडर की संघर्ष गाथा पर केंद्रित उपन्यास ‘दर्द न जाने कोय’ अयोध्या के डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने एमए हिंदी द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। उन्हें यह जानकारी विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति के समन्वयक डॉ. राधेश्याम सिंह ने एक पत्र के माध्यम से दी है।
हिंदी व संस्कृत में एमए के साथ दोनों विषयों में पीएचडी कर चुके डॉ. दत्त की इससे पूर्व चार कहानी संग्रह, दो कविता संग्रह और साहित्य पर आधारित दो संपादित पुस्तकेें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। विवि के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया उपन्यास गत वर्ष कानपुर के विकास प्रकाशन से प्रकाशित होते ही चर्चा में आ गया था। 24 सितंबर 1976 को जन्में डॉ. दत्त वर्तमान में मीरानपुर कटरा में सीबीएसई से संबद्ध राममुरारी पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके परिवार में माता सहित पत्नी और दो बेटियां हैं। डॉ. लवलेश ने कहा कि उन्होंने कभी किसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर कुछ नहीं लिखा, केवल मन के विचारों को शब्दों के जरिए कागजों पर उकेरने का प्रयास जारी है।