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दार्शनिक विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी की भूमिका अहम : प्रो. कृष्ण

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बरेली। हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि भारतीय मनीषा और ज्ञान की जीवंतता को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम भी है। भारतीय ग्रंथों, साहित्य और दार्शनिक विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी की अहम भूमिका रही है। ये बातें रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में प्रमुख वक्ता के रूप में हिंदी विभाग जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार कौशिक ने कहीं।
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रुविवि के बहुभाषिक अध्ययन केंद्र के तहत संचालित फंक्शनल हिंदी संकाय ने मंगलवार को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी विषय पर कार्यशाला आयोजित की। मुख्य अतिथि बरेली कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्याम पाल सिंह मौर्य ने कहा कि हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य मात्र भाषा का प्रचार-प्रसार नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नए सिरे से समझने और आत्मसात करने का प्रयास करना है।
फंक्शनल हिंदी के शिक्षक कृष्ण केतन ने कहा, वर्तमान समय में फंक्शन हिंदी न केवल सरकारी कार्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि व्यापार, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में भी इसकी महत्ता तेजी से बढ़ रही है। कार्यशाला का शुभारंभ मानविकी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनीता त्यागी ने व संचालन फ्रेंच भाषा के विद्यार्थी उत्तम मित्तल ने किया। संवाद
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