बरेली। हिंदी अब भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी चमक बिखेर रही है। तमाम देशों के सहज रूप में अंगीकार किए जाने से हिंदी अब विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है। इंटरनेट की दुनिया में भी हिंदी की पकड़ निरंतर मजबूत हो रही है। हिंदी प्रेमियों का मानना है कि हिंदी को लेकर जो वातावरण बन रहा है, उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में इस भाषा का वर्चस्व और बढ़ेगा।
सहज रूप से हिंदी को अंगीकार कर रही है दुनिया
आज भारत में ही नहीं बल्कि मारीशस, फिजी, गुयाना, नेपाल, भूटान, फ़्रांस, जर्मनी, चीन, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड जैसे विश्व के विभिन्न देशों में हिंदी को सहज रूप से अंगीकार किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि विश्व भर में लोग बिना किसी भाषा-द्वेष के देवनागरी लिपि में हिंदी को सुन-समझ और बोलने के साथ लिख-पढ़ भी रहे हैं। विभिन्न संस्थाओं में इसके शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुवाद और शोध आदि से संबंधित अकादमिक कार्य भी किए जा रहे हैं। यद्यपि आश्चर्य की बात है कि विश्वपटल पर हिंदी भाषा एवं साहित्य के पहले से अधिक सशक्त होने के बाद भी हम हिंदी के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। हमारी यह चिंता नई नहीं है। विशेष रूप से हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़े से जुड़ा इसका अपना इतिहास है और इतिहास हमेशा रहता है और जो नहीं रहता है वह है वर्तमान। वर्तमान इतना व्यापक एवं विशिष्ट है कि इंटरनेट के विस्तार से अब हिंदी भाषा वैश्विक जनमानस की हो गई है। इसलिए इसे अब किसी शासनादेश रूपी समर्थन या अहिंदी भाषियों की स्वीकृति की प्रतीक्षा नहीं है। हो सकता है कि कई विचारक गंगा की अविरल धारा की तरह सतत् प्रवाहमान हिंदी की वर्तमान स्थिति से संतुष्ट न हों किंतु उनकी संतुष्टि हिंदी का लक्ष्य कदापि नहीं हो सकती। - डॉ. अवनीश सिंह चौहान, कवि-आलोचक एवं अनुवादक
राजभाषा बनने के बाद भी हिंदी उपेक्षित क्यों
हिंदी को राजभाषा तो बना दिया गया परंतु उसे अभी वह सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है जिसकी वह अधिकारी है। यह एक जिज्ञासा का विषय हो सकता है कि आखिर क्या कारण रहे हैं कि हिंदी राजभाषा पद पर शोभायमान रहते हुए भी निरंतर उपेक्षित हो रही है। यद्यपि देखा जाए तो समाज में यह भी स्पष्ट है कि उच्चवर्गीय माने जाने वाले लोग अंग्रेजी में बोलना अपनी शान समझते हैं और हिंदी की हमेशा ही उपेक्षा करते रहे हैं। हिंदी को बढ़ावा तभी मिल सकता है जब अनेकानेक संस्थान हिंदी को लोकप्रिय बनाने में और अधिक सहयोग करें। हिंदी साहित्य को और ज्यादा समृद्घ बनाने की जरूरत है।- मोहित शर्मा, -रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एनएसएस के टीम लीडर