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Bareilly News: कताई मिलों की देनदारी निपटाएगी सरकार, यूपी सीडा विकसित करेगा इंडस्ट्रियल स्टेट

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बरेली। प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार बंद पड़ी 20 कताई मिलों की देनदारी निपटाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पिकअप संस्था, बैंकर्स और अन्य विभागों का बकाया अदा करने के लिए बातचीत हुई है। बकाया अदा करने के बाद मिलों की खाली पड़ी जमीन यूपीसीडा को दी जाएगी जो उस पर इंडस्ट्रियल स्टेट विकसित करेगी। उद्यमियों को नए उद्योग लगाने के लिए जमीन आवंटित की जाएगी। इसी तरह से एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक इंटरचेंज के किनारे 200-300 हेक्टेयर जमीन पर इंडस्ट्रियल स्टेट के लिए आरक्षित होगी। यूपीडा इंडस्ट्रियल पार्क बनाएगा।
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बरेली-मुरादाबाद मंडल के उद्यमी, निर्यातक, किसान कनेक्ट 2024 के तहत संवाद और समाधान कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकार ने एक्सप्रेसवे बनाकर काम किया है। मुख्यमंत्री एक ट्रिलियन डॉलर (लगभग 85 लाख करोड़ रुपये) की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। इसके लिए सरकार ने पहल की है, एक्सप्रेसवे में जहां-जहां पर इंटरचेंज हैं, वहां-वहां पर सरकार 200-300 हेक्टेयर जमीन लेगी। अभी तक पांच हजार हेक्टेयर जमीन ली जा चुकी है। कुछ ही दिन में इसका विज्ञापन आने वाला है। उद्योगों के लिए भूमि का आवंटन होगा। भूमि अधिग्रहण की लागत और उस पर कराए गए विकास कार्य का शुल्क लेकर भूमि का आवंटन उद्यमियों को किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए जमीन महंगी है, क्योंकि अधिकतर जमीन उपजाऊ है। एक अच्छी खबर यह भी है कि सरकार कताई मिलों की जमीन यूपी सीडा को देने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास कर चुकी है। लंबे समय से ब्लॉक पड़ी जमीन पर अब इंडस्ट्रियल एरिया विकसित हो सकेंगे। इसलिए अब प्रयास किया जा रहा है कि कम दाम पर जमीन उद्योगों के लिए मिले। अगर 100 करोड़ रुपये से ऊपर की एफडीआई वाली इंडस्ट्री है तो उसे जमीन में 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।



मिट्टी की खोदाई के लिए नहीं है कोई पाबंदी



मिट्टी खनन के लिए किसी परमिट और लाइसेंस की जरूरत नहीं है और किसी भी विभाग को देखने का हक नहीं है। अब अपनी जेसीबी से खोदाई कर सकते हैं। ये एक जमाने में था जब मिट्टी खोदाई हाथ से कर सकते थे, जेसीबी से नहीं, लेकिन अब ये रोक हटा दी गई है। उत्तर प्रदेश इकलौता प्रदेश है, जहां मिट्टी से रॉयल्टी हटा दी गई है। अभी दस, पंद्रह दिन पहले ही पर्यावरण और खनन विभाग के प्रावधानों को शामिल करते हुए शासनादेश जारी किया गया है। कहीं कोई दिक्कत आती है तो आप अपने अधिकारियों को बता सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए।
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-अब हमें सोलर की ओर जाना है। अगर ग्रामीण क्षेत्र में कोई फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लगाते हैं तो 70 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने के लिए 50 प्रतिशत लागत अनुदान के रूप में दी जाएगी। अगर इंडस्ट्री की मुखिया महिला है तो लागत का 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। ब्यूरो
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