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Bareilly News: कूड़ा निस्तारण... एक करोड़ खर्च, फिर भी दूर न हुआ कचरे का दाग

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बरेली। एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके शहर में बनाए गए 40 मिनी मैटेरियल रिकवरी फैसलिटी (एमआरएफ) सेंटर अधूरे पड़े हैं। यहां सूखे कूड़े से प्लास्टिक, धातुओं को अलग-अलग कर निस्तारित किया जाना है। इंतजार में तीन महीने बीत गए, पर इनकी शुरुआत नहीं हो सकी। यही हाल रहा तो इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में शहर को राष्ट्रीय स्तर पर 80वां और प्रदेश स्तर पर 10वां स्थान मिला था। इसमें और सुधार के लिए नगर निगम ने अप्रैल में मिनी एमआरएफ सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसके तहत जगह-जगह लोहे के पोर्टेबल केबिन रखवाए गए। दस मीटर चौड़े और तीस मीटर लंबे केबिन की कीमत दो लाख रुपये से अधिक है। 40 केबिन पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। विभिन्न वार्डों में इन्हें स्थापित किया गया, लेकिन संचालन नहीं हो सका।
पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि गौटिया में एक केबिन लंबे समय से खाली खड़ा है। अगर कूड़े के निस्तारण में इनका उपयोग किया जाता तो स्वच्छता बढ़ती। केबिन खरीदने में जितनी जल्दबाजी की गई, उनके संचालन के लिए वह उत्सुकता नजर नहीं आई। नतीजा, अभी तक गीला और सूखा कूड़ा एक संग बाकरगंज जा रहा है। शहर की आबोहवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है।
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मिनी एमआरएफ सेंटरों के संचालन की तैयारी चल रही है। केबिन रखने की जगह को लेकर असहमति होने की वजह से इनके संचालन में देरी हुई। अब और देरी नहीं होगी। प्लेटफाॅर्म बनेंगे, फिर बिजली कनेक्शन कराएंगे। इसके बाद संचालन होगा। इसमें एक माह लगेंगे। - संजय कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
साथ-साथ कराना चाहिए था काम
सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता राजेंद्र आर्य ने बताया कि होना यह चाहिए था कि एक तरफ प्लेटफॉर्म बनवाते और दूसरी ओर केबिन खरीदने का ऑर्डर देते। तीन महीने में ही संचालन शुरू हो सकता था। शहर में कूड़ा निस्तारण की चुनौती से निपटने के लिए ऐसा करना जरूरी था, जो नहीं हो सका। अब अफसर कितना भी जल्दी करेंगे तो एक महीना लग जाएगा। अमर उजाला ब्यूरो

कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधरे जिम्मेदार, सफाई व्यवस्था धड़ाम
- स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत निरीक्षण के लिए कभी भी आ सकती है केंद्रीय टीम, रैंकिंग गिरने का खतरा
बरेली। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का वेतन रोकने के साथ सफाई नायक राजकुमार को निलंबित किए जाने के बाद भी जिम्मेदारों ने अपना रवैया नहीं बदला। दिवाली सिर पर है और शहर की सफाई व्यवस्था धड़ाम हो गई है। इस बीच स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत निरीक्षण के लिए केंद्रीय टीम कभी भी शहर आ सकती है। ऐसे में स्वच्छता रैंकिंग प्रभावित होने का खतरा है।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सफाई व्यवस्था में लापरवाही उजागर होने पर नगर आयुक्त ने यह कार्रवाई की थी। इसके बाद लग रहा था कि शहर की सफाई व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा।गलियों और सड़कों के किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। समय से कूड़ा उठान नहीं हो रहा है। पुराने शहर और सुभाषनगर में हालात ज्यादा खराब हैं।

पुराने शहर के सूफी टोला, सेमलखेड़ा, घेर जाफर खां, जोगी नवादा समेत सौदागरान, जखीरा, सुभाषनगर, इज्जतनगर के कई इलाकों में सड़कों पर कूड़ा पड़ा रहता है। दो-तीन दिनों तक कूड़ा गाड़ियों के नहीं पहुंचने की शिकायतें भी आ रही हैं। संवाद

शहर की सफाई व्यवस्था की हालत नहीं सुधरी तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छता से कोई समझौता नहीं होगा। - उमेश गौतम, महापौर
सफाई व्यवस्था से संबंधित जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनको दिखवाकर निस्तारण कराया जाएगा। शहर को पूरी तरह स्वच्छ किया जाएगा। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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