बरेली। शहरवासियों के घरों से कूड़ा उठान की व्यवस्था नगर निगम व ठेकेदारों के बीच चल रही खींचतान में फंस गई है। विभिन्न वार्डों के 80 हजार परिवार इस सुविधा के इंतजार में हैं। ठेकेदार जमानत और जुर्माने की शर्तों को बाधा बताकर बार-बार नगर निगम की घरों से कूड़ा उठाने की व्यवस्था का ठेका लेने से परहेज कर रहे हैं। वहीं नगर निगम अधिकारी इसे स्थानीय फर्म संचालकों की मनमानी करार देते हुए बाहरी फर्मों को भड़काने की बात कह रहे हैं। स्थिति यह है कि मंगलवार को छठवीं बार ठेका उठाने के लिए टेंडर डाले गए हैं। ये व्यवस्था दुरुस्त होने से न केवल आम नागरिकों की परेशानी दूर होगी, बल्कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।
करीब 13 लाख आबादी वाले 80 वार्डों के इस शहर में 2,10,000 परिवार ऐसे हैं जिनको डोर-टू-डोर सर्विस देने के दावे नगर निगम अफसर कई साल से कर रहे हैं, लेकिन हकीकत जुदा है। बड़ी आबादी सुविधाओं से वंचित है। चाय-पे-चर्चा के दौरान मंगलवार को पार्षदों ने नगर आयुक्त के सामने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का टेंडर न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम न तो खुद जिम्मेदारी उठा पा रहा है और न ही निजी एजेंसी का चयन कर पा रहा है। तीन महीने में पांच बार टेंडर निकाले गए, लेकिन ठेका नहीं उठ सका। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को डाले गए टेंडर 17 जनवरी को खुलेंगे। अगर वित्तीय और संसाधनों के लिहाज से अहर्ता पूरी हुई तो फर्म चयनित होगी।
फिलहाल ये है स्थिति
शहर चार जोन में बंटा हुआ है। दो जोन में निजी फर्म और दो जोन में नगर निगम खुद घरों से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी संभाले है। इसके बावजूद चारों जोन में आधी-अधूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। स्वच्छता की रैंकिंग में भी इसी वजह से नगर निगम पिछड़ गया। अगर 80-90 प्रतिशत घर कूड़ा उठान की सुविधा से जुड़ गए होते तो देश के टॉप 25 शहरों में बरेली का नाम हो सकता था।
पार्षदों ने उठाया मुद्दा
खाली प्लाटों में कूड़ा फेंक रहे लोग
डोर टू डोर सर्विस न मिलने पर स्वालेनगर और कुंवरपुर समेत कई वार्डों में लोग घरों के बाहर स़ड़क के किनारे और खाली प्लाटों में कूड़ा फेंक रहे हैं। कुंवरपुर के पार्षद सागर मौर्य ने बताया कि उनके वार्ड में 2000 घर हैं। कूड़ा करीब एक हजार घरों से ही लिया जाता है। स्वालेनगर के पार्षद अलीम खां सुल्तानी ने कहा कि डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी हर घर की देहरी तक नहीं पहुंच रही।
इन शर्तों में फंसा टेंडर
अगर कोई फर्म चार जोन का टेंडर लेती है तो उसे ढाई करोड़ रुपये फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा करने होंगे। अगर टेंडर लेने वाली फर्म कुल उपभोक्ताओं में से 50 फीसदी से यूजर चार्ज वसूलकर नगर निगम में जमा नहीं कर पाती है तो जितनी क्षति नगर निगम को हो रही होगी, उसका 200 प्रतिशत फर्म को जमा करना पड़ेगा। एक ठेकेदार ने कहा कि एक ओर नगर निगम जुर्माना वसूल रहा है तो दूसरी ओर लक्ष्य से अधिक वसूली पर कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दे रहा है। प्रोत्साहन देने का प्रावधान नगर निगम ने जोड़ा तो कुछ ठेकेदार बोले कि...बाबूगिरी हावी है। भुगतान की व्यवस्था ठीक नहीं है।
कोट-
अधिकारी बोले...पुराने ठेकेदार वर्चस्व चाहते हैं
यूजर चार्ज जमा न करने पर सितंबर में एक निजी फर्म को काली सूची में डाला गया। इसके बाद टेंडर निकाले गए लेकिन जो ठेकेदार पहले काम कर चुके हैं वे वर्चस्व चाहते हैं और बाहर से आने वाली फर्मों को गलत जानकारी देते हैं। ऐसे में नगर निगम को बार-बार टेंडर निकालने पड़ रहे हैं, जिन शर्तों पर ठेकेदारों की आपत्ति थी, उनमें हमने ढिलाई दी है। उम्मीद है कि जल्द ही कोई फर्म चयनित होगी।-अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
एक्सपर्ट कमेंट
सूरत मॉडल शहर में लागू करें
सेवानिवृत अभियंता राजेंद्र आर्य का कहना है कि वह मुरादाबाद-आगरा नगर निगम में अभियंता रहे। डोर टू डोर सर्विस को करीब से देखा है। नगर निगम के अफसरों को आंकड़ेबाजी से बाहर आना होगा। आंकड़ेबाजी करेंगे तो पदक तो मिल सकता है लेकिन हकीकत में स्थिति तब सुधरेगी जब अधिकारी जमीन पर काम कराएंगे। सूरत में दोनों टाइम गली-मोहल्लों की भी सफाई होती है। बरेली में भी इसे अपनाएं और ऐसी फर्म का चयन करें जो इस जिम्मेदारी को उठा सके।